जबलपुर। उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश डायल 112 सेवा के संचालन हेतु दिए गए भारी-भरकम ठेके को लेकर अपना महत्वपूर्ण निर्णय सुना दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा सिकंदराबाद की कंपनी को दिए गए कार्य आदेश को सही ठहराते हुए विपक्षी कंपनी की आपत्तियों को सिरे से नकार दिया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले में स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की तथ्यात्मक त्रुटि या नियमों का उल्लंघन नहीं पाया गया है। इस फैसले से प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं के सुचारू संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है और सरकार को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
अनुबंध की वैधता और अदालती निर्णय
मध्य प्रदेश सरकार ने डायल 112 सेवा के आगामी 5 साल के प्रबंधन के लिए 972 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था। इस निविदा प्रक्रिया में सिकंदराबाद स्थित ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज को सबसे उपयुक्त पाया गया और उन्हें अनुबंध सौंपा गया। इस निर्णय को बीवीजी इंडिया लिमिटेड ने अदालत में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच ने पूरे मामले की बारीकी से समीक्षा करने के बाद पाया कि सरकार की चयन प्रक्रिया पूरी तरह विधि सम्मत है। अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि टेंडर आवंटित करने के प्रशासनिक निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार मौजूद नहीं है।
याचिकाकर्ता के तर्क और सरकारी पक्ष
बीवीजी इंडिया लिमिटेड की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि सफल बोलीदाता ने निविदा प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया है। याचिकाकर्ता कंपनी का दावा था कि चयन के दौरान तथ्यों को अनदेखा किया गया। इसके विपरीत, राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ताओं ने दलील दी कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही है और सभी मापदंडों का कड़ाई से पालन किया गया है। सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज की साख और उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही 972 करोड़ रुपये का यह अनुबंध प्रदान किया गया है।
कंपनी का अनुभव और निविदा की शर्तें
यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि याचिकाकर्ता कंपनी बीवीजी इंडिया लिमिटेड पिछले 10 साल से मध्य प्रदेश में डायल 112 सेवाओं का संचालन कर रही थी। लंबे समय तक सेवा देने के आधार पर कंपनी इस ठेके पर अपना दावा मजबूत मान रही थी। लेकिन नई निविदा शर्तों और तकनीकी मूल्यांकन में ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज ने बाजी मार ली। सरकार ने 5 साल की अवधि के लिए नई कंपनी के साथ अनुबंध को वैध ठहराया है। अदालत ने माना कि पूर्व में सेवा देने का अनुभव मात्र किसी कंपनी को भविष्य के सभी टेंडरों के लिए स्वत: पात्र नहीं बना देता, यदि कोई अन्य कंपनी बेहतर शर्तों और तकनीकी दक्षता के साथ सामने आती है।
प्रदेश की आपातकालीन सेवाओं पर प्रभाव
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश में डायल 112 सेवा के आधुनिकिकरण और विस्तार का काम तेजी से आगे बढ़ेगा। 972 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश भर में पुलिस सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाना है। ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज अब आगामी 5 वर्षों तक राज्य की इस महत्वपूर्ण सेवा का जिम्मा संभालेगी। न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना समाप्त होने से अब उपकरणों की खरीद, नए वाहनों की तैनाती और कंट्रोल रूम के उन्नयन का कार्य बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सकेगा। सरकार के लिए यह जीत नीतिगत निर्णयों की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
