WCREU ने पमरे की जीएम को लिखा लेटर, मजदूर संघ के मनमाने चंदा कटौती नियमों पर जताई आपत्ति, रोक की मांग

जबलपुर. वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन (डबलूसीआरईयू) ने पमरे के तीनों रेल मंडलों, कारखानों में मान्यता प्राप्त संगठन (मजदूर संघ) द्वारा मनमाने ढंग से वार्षिक सदस्यता शुल्क एवं लेव्ही की राशि की वेतन से कटौती के लिये जारी जेपीओ पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कार्रवाई करने का पत्र महाप्रबंधक को लिखा है। पत्र में जेपीओ के कुछ बिंदुओं को कर्मचारी के खिलाफ बताया है.

डबलूसीआरईयू के महामंत्री मुकेश गालव ने पमरे के महाप्रबंधक को लेटर लिखा है, जिसमें मान्यता प्राप्त संगठन के रेल कर्मचारियों के वेतन से वार्षिक सदस्यता शुल्क व लेव्ही की शुल्क के जो जेपीओ जारी किये हैं. वे अत्यंत ही आपत्ति जनक है। श्री गालव ने कहा कि यूनियन को तीनों मण्डलों के कई कर्मचारियों ने लिखित में प्रतिवेदन प्रस्तुत कर यूनियन के संज्ञान में लाया है कि मुख्यालय द्वारा उक्त संदर्भित पत्र के साथ मान्यता प्राप्त संगठन को वार्षिक सदस्यता/लेव्ही शुल्क की कर्मचारियों के वेतन से कटौती का जेपीओ आया है, उस पर यूनियन निम्नानुसार आपत्ति दर्ज कराना चाहता है।

ये है आपत्ति के प्रमुख बिंदु

- जे.पी.ओ के मद 6 में काटे जा चुके सदस्यता शुल्क/लेबी शुल्क की वापिसी का प्रावधान नहीं रखा गया है जबकि पूर्व में बड़ी संख्या में ऐसे प्रकरण सामने आये थे जहां कर्मचारी से सहमति फॉर्म में हस्ताक्षर ही नहीं किये थे, बल्कि उनके फर्जी हस्ताक्षर का फॉर्म जमा किये गये थे। अत: ऐसे फर्जी मामलों में कर्मचारियों की काटी गई राशि वापिस प्राप्त करने की पात्रता होनी चाहिये। इसमें जो यूनियन के प्रमाणितकरण/अर्थाराइजेशन का क्लाज जोड़ा गया है। उसे हटाया जाये अन्यथा फर्जी मेम्बरशिप की राशि कर्मचारियों को वापिस प्राप्त नहीं हो पायेगी।

- जे.पी.ओ. की मद 11 अत्यन्त आपत्तिजनक है। इससे प्रावधान कर दिया गया है कि एक बार कर्मचारी द्वारा मेम्बरशिप/लेव्ही की राशि देने स्वीकृति दे दी जाये। तो वह अनंतकाल तक प्रभावी रहेगी, आगे के वर्षों में भी मेम्बरशिप / लेव्ही कर्मचारी से दोबारा सहमति पत्र लिंए बीना ही काटी जाती रहेगी। यदि कर्मचारी सहमति वापिस लेना चाहे तो संगठन के अथराइजेशन के बाद ही सहमति वापिस होगी। अब विचारणीय तथ्य यह है, कि संगठन क्यों मेम्बरशिप रद्द करने की सहमति देगी? ऐसी स्थिति में कर्मचारी के रिटायमेन्ट तक संगठन को मेम्बरशिप / लेव्ही की राशि कर्मचारी की इच्छा के विरुद्ध प्राप्त होती रहेगी।

-  जे.पी.ओ की मद 13 भी अत्यन्त आपत्तिजनक है कि कर्मचारी के स्थानांतरण अन्य मंडल/यूनिट में भी उनकी सदस्यता शुल्क/लेही देने की सहमति जीवित रहेगी, भले ही नई यूनिट/मंडल पर वह संगठन के कार्यों से संतुष्ट हो या ना हो, उससे नये मंडल/यूनिट मे संगठन का कोई पदाधिकारी/कार्यकर्ता सम्पर्क भी नहीं करेगा, ना उसकी समस्या सुनेगा क्योंकि सदस्यता शुल्क/लेवी राशि बिना किसी प्रयास के ही संगठन को प्राप्त होता रहेगा।

- यूनियन ने पत्र में मांग की कि जे.पी.ओ. जारी होने से पूर्व जिन कर्मचारियों के हस्ताक्षार करवा लिए हैं उनकी काटी गई राशि वापस की जाए। यूनियन ने कहाकि इस जेपीओ के संबंध में प्रशासन कर्मचारियों को संपूर्ण जानकारी नहीं दे रहा है, जो उसकी पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा रहा है. यूनियन महामंत्री का. गालव ने महाप्रबंधक से अपेक्षा की है कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा प्रशासनिक पारदर्शिता व नियमोचित कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु निर्णायक हस्तक्षेप की अपेक्षा है।

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