जबलपुर। जबलपुर स्थित विशेष सशस्त्र बल की छठी बटालियन में हुआ यात्रा भत्ता घोटाला अब और गहरा गया है। शुरुआती जांच में 2 करोड़ का माना जा रहा यह गबन अब 3 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इस मामले में रांझी थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एएसआई और एक मृत आरक्षक समेत कुल 15 कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। घोटाले का मुख्य सूत्रधार एलडीसी बाबू सत्यम शर्मा फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।
फर्जी बिलों का खेल: वेतन से 200 गुना ज्यादा मिला भत्ता
यह पूरा घोटाला साल 2018-19 से लगातार चल रहा था, जिसका खुलासा नवंबर 2025 में हुआ। जांच में सामने आया कि टीए शाखा में पदस्थ सत्यम शर्मा फर्जी बिल तैयार कर सरकारी खजाने को चूना लगा रहा था। आरक्षकों को कागजों पर जिले से बाहर ड्यूटी पर दिखाया जाता था, जबकि वे जबलपुर में ही तैनात रहते थे। स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल की रिपोर्ट के मुताबिक, कई आरक्षकों के खातों में उनकी सैलरी से 200 गुना ज्यादा रकम मिली है। 12 आरक्षक ऐसे पाए गए हैं जिनके खातों में सिर्फ टीए बिलों के जरिए 10-10 लाख रुपए जमा किए गए।
एक ही खाते में 582 बार भुगतान और कमीशन का जाल
घोटाले की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। मुख्य आरोपी सत्यम शर्मा भुगतान से पहले आने वाला ओटीपी खुद लेता था और राशि का बड़ा हिस्सा कैश के रूप में वापस ले लेता था। उदाहरण के तौर पर, आरक्षक अभिषेक झारिया के खाते में 582 बार में 55 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए, जबकि उसकी कुल सर्विस सैलरी महज 26 लाख रुपए थी। इसी तरह नीतेश कुमार पटेल नाम के कर्मचारी को भी वेतन से कहीं अधिक यात्रा भत्ता भुगतान किया गया। सत्यम शर्मा जांच से बचने के लिए खुद के खाते में पैसे न लेकर सहयोगियों के खातों का इस्तेमाल करता था और उन्हें 50% राशि का लालच देता था।
दबाव में आरक्षक की खुदकुशी और दोतरफा जांच जारी
मामला उजागर होते ही विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए आरोपियों को निलंबित कर दिया था। निलंबन और जांच के दबाव के चलते आरक्षक अभिषेक झारिया ने 12 नवंबर को ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। वहीं, मास्टरमाइंड सत्यम शर्मा अपनी शादी का कार्ड सामने आने के बाद से गायब है। वर्तमान में इस घोटाले की जांच दो स्तरों पर चल रही है, एसएएफ कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी की तीन सदस्यीय टीम और कलेक्टर द्वारा गठित 6 सदस्यीय विशेष कमेटी। अब तक 20 से ज्यादा आरक्षकों के बैंक खाते फ्रीज किए जा चुके हैं और पुलिस फरार आरोपियों की धरपकड़ में जुटी है।
