बताया गया है कि उचेहरा के बोदाहार गांव में शिकारियों ने तेंदुआ का शिकार करने के लिए खेत के पास क्लच वायर का जाल बिछा दिया। इस बीच यहां पर पहुंचा तेंदुआ शिकारियों के बिछाए गए जाल में फंस गया। दोपहर के वक्त वन विभाग की टीम गश्त करते हुए पहुंची तो उसकी नजर तेंदुआ पर पड़ी, देखा कि तेंदुआ की गर्दन तारों के बीच फंसी हुई है। घटना की खबर मिलते ही मुकुंदपुर जू से वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ नितिन गुप्ता अपनी टीम के साथ पहुंचे। जिन्होने तेंदुए को बेहोश करने के लिए ट्रेंकुलाइजर गन का इस्तेमाल किया। शुरुआती दो प्रयास विफल रहे लेकिन तीसरे प्रयास में तेंदुआ बेहोश हो गया। इसके बाद टीम ने सावधानीपूर्वक तार काटकर उसे मुक्त कराया। रेस्क्यू के बाद स्वास्थ्य परीक्षण में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। अधिकारियों का कहना है कि निरीक्षण में पाया गया कि तेंदुआ क्लच वायर के फंदे में फंसकर छटपटा रहा था। उसके कमर में फंदा लगा हुआ था लेकिन कसा न होने से वह निकलने की कोशिश कर रहा था। विशेषज्ञों ने तेंदुए को ट्रैंक्युलाइज कर उसका मेडिकल परीक्षण किया। जांच में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से परसमनिया के घने जंगल में छोड़ दिया गया। इसके बाद टीम ने डॉग स्क्वाड की मदद से करीब दो किलोमीटर तक पीछा कर खोह गांव में एक घर में दबिश देकर विनोद पिता राममिलन रावत को पकड़ा। जिसने पूछताछ में अपने साथियों के साथ मिलकर तेंदुए को फंसाने की बात स्वीकार की।
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