पेंशनर्स का आर्थिक शोषण बंद करे सरकार, बिजली कंपनियों के निजीकरण पर रोक की मांग


जबलपुर।
केंद्र सरकार द्वारा पुराने 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर लाई गई चार नई श्रम संहिताओं के विरोध में मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने व्यापक धरना-प्रदर्शन किया। 10 राष्ट्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर आयोजित इस हड़ताल के माध्यम से बिजली कंपनियों के निजीकरण को रोकने और पुरानी पेंशन बहाली की पुरजोर मांग की गई। फेडरेशन के महामंत्री राकेश डीपी पाठक ने संबोधित करते हुए कहा कि नई श्रम संहिताएं पूरी तरह उद्योगपतियों के हित में हैं। इससे श्रमिकों की सुरक्षा और समस्याओं का समाधान कठिन हो जाएगा और प्रबंधन की मनमानी बढ़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मालिक और पूंजी के पक्ष में संतुलन झुका दिया है, जिससे कर्मचारियों की छंटनी आसान हो गई है। बिजली सेक्टर में 15 वर्षों से कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी नियमितीकरण की बाट जोह रहे हैं, सरकार को उन्हें बिना शर्त नियमित करना चाहिए। कार्यपालन अभियंता अमित सक्सेना ने भी कर्मचारियों के हित संवर्धन की बात दोहराई। ​नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि पुरानी पेंशन बहाल नहीं हुई और धारा 49 जैसी विसंगतियों को दूर कर पेंशनर्स को महंगाई राहत नहीं दी गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नाम

विरोध प्रदर्शन में अमित सक्सेना, राकेश डी.पी. पाठक, सीताराम कुरचानिया, आरएस परिहार, दिनेश दुबे, अनूप वर्मा, उमाशंकर दुबे, अवनीश तिवारी, राजेश मिश्रा, रवि चौबे, श्रीकांत दुबे, डीके चतुर्वेदी, अजय चौबे, मनोज पाठक, मोहित पटेल, दिलीप पाठक, संजय सिंह, अक्षय श्रीवास्तव, आरके परोहा, सुधीर कुमार मिश्रा, विनय पाठक, संदेश यादव, शिवहरि श्रीवास्तव, विजय तिवारी किसलय, अविनाश तिवारी, सुरेन्द्र तिवारी, बसंत मिश्रा, अभिनव कृष्ण त्रिपाठी, दयाशंकर, विजय डोंगरे, सतेन्द्र सुहाने, मनोज सिंह, शुभम चंदेल, विशाल नेमा, राजेन्द्र चक्रवती, रवि बहादुर सिंह, एच.एम. मसूंरी, संजय अहिरवार, एस.के. चौधरी, दिलीप यादव, विवेक चौबे, आशीष गुर्गे और शैलेन्द्र जैन सहित बड़ी संख्या में अभियंता एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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