जबलपुर। जबलपुर में बने मध्य प्रदेश के सबसे लंबे फ्लाईओवर पर इन दिनों सफर सुहाना कम और खतरनाक ज्यादा हो गया है। यातायात नियमों की सरेआम अनदेखी के कारण यह फ्लाईओवर अब हादसों का केंद्र बनता जा रहा है। वाहन चालक सड़क सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों को समझे बिना ही तेज रफ्तार में वाहन दौड़ा रहे हैं, जिससे हर पल गंभीर दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। फ्लाईओवर पर जहां से मुड़ने की सख्त मनाही है, वहां से लोग यू-टर्न ले रहे हैं और प्रतिबंधित रैंप से भी वाहनों को चढ़ाया जा रहा है। स्थिति यह है कि यातायात पुलिस द्वारा लगाए गए चेतावनी बोर्ड और जागरूकता अभियान का भी लोगों पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है।
रैंप और रोटरी पर नियमों का उल्लंघन
फ्लाईओवर के डिजाइन में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मदन महल स्टेशन और बल्देवबाग जैसे क्षेत्रों में विशेष रैंप बनाए गए हैं। मदन महल स्टेशन के पास का रैंप रानीताल से आने वाले वाहनों को शास्त्री ब्रिज की ओर भेजने के लिए है, जहां से ऊपर चढ़ना पूरी तरह वर्जित है। इसके बावजूद, लोग जान जोखिम में डालकर वहां से वाहन ऊपर ले जा रहे हैं, जिसके कारण कई बार आमने-सामने की भिड़ंत हो चुकी है। यही हाल बल्देवबाग से राइट टाउन की ओर उतरने वाले रैंप का है। यहां यातायात सुगम बनाने के लिए बनाई गई रोटरी का पालन करने के बजाय चालक रोटरी के आगे से ही गलत तरीके से टर्न ले रहे हैं। इस मनमर्जी के कारण न केवल छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं, बल्कि रोटरी के आसपास जाम की स्थिति भी निर्मित हो रही है।
रिस्की है यू-टर्न,फिर भी जारी है बेपरवाही
दमोह नाका से दशमेश द्वार तक बने इस फ्लाईओवर में कुल आठ रैंप हैं, जिन्हें अलग-अलग दिशाओं के लिए डिजाइन किया गया है। फ्लाईओवर के ऊपर कहीं भी यू-टर्न की सुविधा नहीं दी गई है, लेकिन चालक नियमों को दरकिनार कर अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी वाहन मोड़ रहे हैं। पूर्व में यातायात पुलिस ने चालानी कार्रवाई और जागरूकता अभियान के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया था, लेकिन सख्ती कम होते ही लोग फिर से पुरानी ढर्रे पर लौट आए हैं। यदि समय रहते इन लापरवाहियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह आधुनिक निर्माण शहर के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
