जबलपुर। भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन को हाईकोर्ट की युगलपीठ से बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने एकलपीठ द्वारा उन्हें अवमानना का दोषी ठहराए जाने और सजा की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। गौरतलब है कि शुक्रवार को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष सजा के प्रश्न पर सुनवाई होनी थी, जिसमें आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना था। लेकिन सुनवाई से ठीक पहले युगलपीठ में आवेदन दायर कर सजा पर स्थगन की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की अनदेखी का मामला
यह पूरा विवाद मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि नगर निगम ने 18 नवंबर, 2025 को उनकी संपत्ति के सामने का हिस्सा बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के ढहा दिया। गुरुवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने पाया कि नगर निगम की यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2025 में जारी की गई गाइडलाइन का स्पष्ट उल्लंघन है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि तोड़फोड़ से पहले न तो याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया और न ही कोई अंतिम आदेश पारित किया गया, जो नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
किस मामले में लटकी थी तलवार
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी संकेत दिया था कि यदि नगर निगम बिना शर्त माफी मांगते हुए तोड़े गए हिस्से को पुन: बहाल करने का आश्वासन देता, तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता था। हालांकि, निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि निर्माण को बहाल करना संभव नहीं है। इसी रुख को देखते हुए एकलपीठ ने इसे शीर्ष अदालत के आदेशों की अवहेलना माना और संस्कृति जैन को अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(बी) के तहत दोषी करार दिया था। फिलहाल, मुख्य न्यायाधीश की बेंच के हस्तक्षेप के बाद सजा की तलवार टल गई है।
