जब जोखिम पुलिस के बराबर तो वेतन असमान क्यों


जबलपुर।
मध्य प्रदेश में होमगार्ड सैनिकों की स्थिति समान कार्य, समान वेतन के सिद्धांत के विपरीत बनी हुई है। जबलपुर सहित प्रदेश भर के होमगार्ड कर्मचारियों से कार्य तो पुलिस विभाग के नियमित जवानों की तरह लिया जा रहा है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें आज भी उपेक्षित रखा गया है। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने आवाज उठाते हुए कहा है कि होमगार्ड सैनिकों को वेतन के स्थान पर केवल मानदेय दिया जा रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है। होमगार्ड सैनिकों को नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता, फंड कटौती, अवकाश नगदीकरण, भविष्य निधि या शासकीय आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। यहाँ तक कि उन्हें साप्ताहिक अवकाश, वर्दी सिलाई और धुलाई तक के पैसे नहीं दिए जाते। संघ के प्रदेश प्रवक्ता अनिल भार्गव 'वायु' के अनुसार, इन सैनिकों की स्थिति मजदूरों से भी बदतर है। जहाँ मजदूरों को कलेक्टर रेट और बीमा का लाभ मिलता है, वहीं 25-30 साल सेवा देने वाले होमगार्ड सैनिक सेवानिवृत्ति के समय खाली हाथ घर लौटते हैं। उन्हें न तो पेंशन मिलती है और न ही ग्रेच्युटी। दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि सेवा के दौरान निधन होने पर उनके परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ भी नहीं दिया जाता।

62 वर्ष में सेवानिवृत्ति की घोषणा अधर में, कर्मचारियों में आक्रोश

​कर्मचारी संघ ने सरकार की वादाखिलाफी पर भी कड़ा रोष जताया है। विगत दिनों इंदौर में स्थापना दिवस समारोह के दौरान वरिष्ठ मंत्री ने घोषणा की थी कि होमगार्ड सैनिकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की जाएगी। लेकिन, अब तक लिखित आदेश जारी न होने के कारण सैनिकों को 60 वर्ष में ही जबरन रिटायर किया जा रहा है। इस विसंगति को लेकर मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जबलपुर जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय, जिला सचिव देवेंद्र पचौरी, कोषाध्यक्ष आलोक अग्निहोत्री सहित बीरेंद्र चंदेल, रामशंकर शुक्ला, योगेश देशमुख, कुलदीप सिंह, सुनील पचौरी, दिलीप यादव, राजा राम डेहरिया, पंकज शर्मा और अर्जुन सोमवंशी ने पुरजोर मांग की है कि होमगार्ड सैनिकों को पुलिस के समान वेतनमान और सेवानिवृत्ति के पश्चात पेंशन का लाभ दिया जाए। संघ का कहना है कि जब जोखिम और ड्यूटी पुलिस के बराबर है, तो अधिकारों में यह भेदभाव समाप्त होना चाहिए।

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