​डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की मृत्यु के बाद उपजा जमीन विवाद खत्म, नगर निगम ने वापस ली करोड़ों की भूमि


जबलपुर
। संस्कारधानी के हृदय स्थल राइट टाउन स्थित प्रेम मंदिर के पास की करोड़ों रुपए मूल्य की बेशकीमती जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। नगर निगम प्रशासन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित जमीन की लीज को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया है। नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के आदेश के बाद अब इस पूरी भूमि को निगम के आधिपत्य में लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह पूरी कार्रवाई अपर आयुक्त और जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें लीज शर्तों के गंभीर उल्लंघन की पुष्टि हुई है।

-​डॉ. की मृत्यु के बाद गहराया था विवाद

​यह पूरा घटनाक्रम राइट टाउन निवासी प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की मृत्यु के बाद चर्चा में आया। उनकी मृत्यु के बाद करीब 25,047 वर्गफीट की इस विशाल भूमि पर मालिकाना हक को लेकर कई पक्ष आमने-सामने आ गए थे। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संपत्ति पर दावा प्रस्तुत करने के लिए 24 घंटे का नोटिस चस्पा किया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई भी पक्ष वैध दस्तावेजों के साथ सामने नहीं आया। इसके बाद नगर निगम आयुक्त के निर्देश पर उपायुक्त शिवांगी महाजन ने एक विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की, जिसमें लीज की शर्तों के उल्लंघन का कच्चा चिट्ठा सामने आया।

-​दानपत्र और वसीयत के जरिए हस्तांतरण को माना गंभीर उल्लंघन

​नगर निगम की जांच में यह खुलासा हुआ कि प्लॉट क्रमांक 51, राइट टाउन की इस लीज भूमि का किराया (भू-भाड़ा) वर्ष 2020-21 से जमा नहीं किया गया था। रिकॉर्ड के अनुसार, यह जमीन डॉ. हेमलता के पति, ससुर और पुत्र के नाम पर दर्ज थी। लीज की शर्तों (क्रमांक 3, 6, 7 और 8) का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि बिना नगर निगम की पूर्व अनुमति के इस सरकारी जमीन को दानपत्र और वसीयत के जरिए हस्तांतरित करने की प्रक्रिया अपनाई गई, जो कि लीज नियमों के विरुद्ध है। निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने स्पष्ट किया कि लीज की जमीन को निजी तौर पर दान करना या वसीयत करना सीधे तौर पर अनुबंध का उल्लंघन है।

-​25 हजार वर्गफीट भूमि अब सीधे नगर निगम के नियंत्रण में

​जांच रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. हेमलता के पति और पुत्र के निधन के बाद जमीन के एक हिस्से (करीब 11 हजार वर्गफीट) को डॉ. सुमित जैन और प्राची जैन को दान में देने की बात सामने आई थी, जबकि शेष 14 हजार वर्गफीट हिस्सा एक धार्मिक संस्था के नाम वसीयत किया गया था। इसी को लेकर आपसी विवाद शुरू हुआ और मामला प्रशासन तक पहुंचा। चूंकि लीज की शर्त क्रमांक 6 निगम को उल्लंघन की स्थिति में जमीन पर पुनः प्रवेश  का अधिकार देती है, इसी आधार पर अब लीज पूरी तरह निरस्त कर दी गई है। अब किसी भी निजी पक्ष का इस पर दावा मान्य नहीं होगा और पूरी जमीन पर नगर निगम का बोर्ड लगा दिया गया है।

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