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पेंशन प्रकरणों के निराकरण में देरी पर फूटा कर्मचारियों का गुस्सा, उग्र आंदोलन की चेतावनी


जबलपुर।
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन प्रकरणों के निराकरण में हो रही देरी और नियमों के भ्रामक प्रचार पर कड़ा ऐतराज जताया है। जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय के नेतृत्व में संघ ने आरोप लगाया है कि पेंशन कार्यालय की कार्यप्रणाली के कारण कई परिवारों को महीनों से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। यदि सात दिनों के भीतर लंबित प्रकरणों का निराकरण नहीं हुआ, तो कर्मचारी संघ पेंशन कार्यालय का घेराव और उग्र प्रदर्शन करेगा।

भोपाल से पीपीओ जारी होने की सूचना से असमंजस की स्थिति

​जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय ने बताया कि पेंशन कार्यालय के अधिकारी कर्मचारियों को यह जानकारी दे रहे हैं कि मार्च माह से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पी.पी.ओ. (पेंशन प्रकरण) भोपाल से जारी किए जाएंगे। इस संबंध में सहायक जिला पेंशन अधिकारी श्रीमती मधु शर्मा द्वारा कथित तौर पर कहा जा रहा है कि 28 फरवरी तक अपने केस करा लें, अन्यथा इसके बाद की प्रक्रिया भोपाल से होगी। संघ ने इस प्रक्रिया को गलत और कर्मचारियों को परेशान करने वाला कदम बताया है।

विभाग और पेंशन कार्यालय के बीच भटक रहे कर्मचारी

​वर्तमान में लोक निर्माण विभाग (PWD) के संभागीय कार्यालयों के कार्यभारित स्थापना के समयपाल, चौकीदार, माली और वाहन चालकों के कई पेंशन प्रकरण श्रीमती मधु शर्मा के पास लंबित हैं। विभाग द्वारा प्रकरण ऑनलाइन भेजने की बात कही जा रही है, जबकि पेंशन कार्यालय इन्हें स्वीकार करने से मना कर रहा है। सेवा पुस्तिका और कंप्यूटर रिकॉर्ड में जन्मतिथि की विसंगतियों के कारण भी कई कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति या निधन के 5-6 माह बाद भी पेंशन नहीं मिल पा रही है।

सात दिन का अल्टीमेटम: निराकरण न होने पर होगा घेराव

​मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों,अटल उपाध्याय, देवेंद्र पचौरी, आलोक अग्निहोत्री, प्रशांत सौंधिया, बीरेंद्र चंदेल, एस पी बाथरे, अरुण पटेल, अर्जुन सोमवंशी, रवि बांगड़, राजाराम डेहरिया, बीरेंद्र तिवारी, अंकित चौरसिया, शैलेन्द्र दुबे, परशुराम तिवारी, शैलेश गौतम, विनय नामदेव, सुशील गुप्ता, सतीश देशमुख, झारिया, महेंद्र पटेल और रविन्द्र राय ने लंबित प्रकरणों पर तत्काल पी.पी.ओ. जारी करने की मांग की है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सात दिवस के भीतर निराकरण न होने पर कार्यालय का घेराव किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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