जबलपुर- मेट्रो रेल का नाम लेने वाला भी नहीं, एमपी सरकार का पूरा फोकस इंदौर, भोपाल में, बजट में भी कोई प्रावधान नहीं

जबलपुर. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लि. (एमपीएमआरसीएल) जिसका गठन ही मध्य प्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर व ग्वालियर में शहरी यातायात को सुगमता प्रदान करने केलिए किया गया था, किंतु उसने सिर्फ दो शहरों भोपाल,  इंदौर तक ही अपने नेटवर्क के विस्तार पर पूरा ध्यान दिया है. अब उज्जैन में भरने वाले सिंहस्थ को देखते हुए इस शहर का नाम भी शामिल किया गया है, किंतु जबलपुर जैसे बड़े शहर का कोई नाम लेने वाला भी नहीं बचा है.

एमपी बजट में भी कोई प्रावधान नहीं

मध्य प्रदेश सरकार ने बुधवार 18 फरवरी को विधानसभा में जो बजट पेश किया गया है, उसमें भी उसने इंदौर, भोपाल, उज्जैन पर ध्यान दिया है. जबलपुर में मेट्रो सेवाओं के लिये सर्वे तक कराने का कोई निर्णय लिया  है. जबलपुर जैसे शहरों में ई-बस चला कर परिवहन की सुविधा देने की बात कही गई है.

आज के प्रयास का 7 सालों बाद फल

जानकारों का तो स्पष्ट कहना है कि किसी भी शहर में मेट्रो जैसे ही रेल परिवहन को शुरू करना है तो आज प्रयास हो तों उसका फल (परिणाम) कम से कम 7 सालों बाद ही लोगों को मिल सकता है. संस्कारधानी वालों को अगले और कुछ साल इसी जद्दोजहद से जूझना पड़ेगा कि उसके लिए सर्वे का काम शुरू हो.

वक्त की जरूरत से मेट्रो सेवाएं

जबलपुर में सड़कों जिस प्रकार पर वाहनों की संख्या में जबर्दस्त वृद्धि हो रही है. शहर की शायद ही कोई सड़क होगी, जिसमें लोग जाम में नहीं फंसते होंगे. ऐसे में लोगों के मन में भी इंदौर, भोपाल की तर्ज पर जबलपुर में भी तीव्र, सुरक्षित परिवहन मेट्रो रेल की इच्छा हो रही है. यानी यहां पर भी मेट्रो रेल सेवा वक्त की जरूरत है, लेकिन यह हो कैसे, इस दिशा में जिम्मेदारों द्वारा फिलहाल किसी तरह के प्रयास करने की जानकारी सामने नहीं आ रही है.

आज करें प्रयास, 7 साल बाद मिल सकेगी सुविधा

मेट्रो रेल सेवा के जानकारों का मानना है कि यदि आज जबलपुर में मेट्रो के कार्य का प्रस्ताव तैयार होता है तो इसे पूर्ण रूप लेने में कम से कम 7 साल तो लगेंगे ही. शुरुआत दो से तीन साल तक तो रूट का सर्वे, जमीन की मजबूती की जांच, ड्राइंग, डिजाइन बनाना होता है, उसके बाद टेंडर आदि का काम होता है. फिर जमीन पर काम शुरु होता है, जिसमें भी काफी धीमी गति से काम किया जाता है. मेन काम में ही 4 साल कम से कम लगता है, यानी पूरा प्रोजेक्ट प्रस्ताव मिलने के बाद 7 साल का समय लगता ही है.

मेट्रो के लिए ऐसे होता है फंड का प्रबंध

सूत्रों के मुताबिक जबलपुर में मेट्रो रेल के लिए फंड कोई समस्या नहीं है, समस्या सिर्फ राजनीतिक इच्छाशक्ति की सामने आ रही है, यदि यहां के जनप्रतिनिधि इस दिशा में आज प्रयास करें तो संस्कारधानीवासियों को 2033-34 में इसका लाभ मिलेगा. जहां तक फंड की बात है तो 20 प्रतिशत राशि राज्य शासन, 20 फीसदी राशि केंद्र सरकार वहन करती है, शेष 60 फीसदी राशि लोन पर मिलती है.

मेट्रो सेवाओं के लिए  वाहनों की संख्या भी महत्वपूर्ण

जानकारों का मानना है कि किसी शहर में मेट्रो रेल के लिए एक निश्चित जनसंख्या होना चाहिए, ये बात सही नहीं है, जनसंख्या के साथ-साथ वाहनों की संख्या में भी महत्वपूर्ण है. जबलपुर में जिस प्रकार लगातार सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है, हर सड़क, क्षेत्र में जाम की स्थिति बन रही है. ऐसे में इसका एक ही हल है कि यहां पर भी मेट्रो रेल के प्रयास किये जाएं.

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