रसोई गैस की कालाबाजारी : प्रशासन के अमले ने मारा छापा, 860 का सिलेंडर 1,400 में मिला, 12 एजेंसियों को नोटिस, देखें वीडियो



खाली सिलेंडर के साथ ग्राहक बनकर पहुँचे थे जांच अधिकारीण्

जबलपुर ।. घरेलू रसोई गैस के व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने जिला प्रशासन द्वारा की गई जांच की कारवाई में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर रिफिल का विक्रय करने का दोषी पाये जाने पर बारह एलपीजी गैस वितरकों को कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किये गये हैं। 

इन रसोई गैस वितरकों में बलदेवबाग स्थित अथर्व गैस एजेंसी के संचालक अमित अग्रवाल, गौतम जी की मढिया के पास संजीवनी नगर स्थित दीप गैस एजेंसी के संचालक आकाश नेचलानी, रौनक कॉम्लेक्स मदन महल स्थित मदनमहल गैस कंपनी के संचालक सुलभ नाईक, गोहलपुर स्थित विश्वनाथ गैस एजेंसी के संचालक सौरभ अग्रवाल, आनंद नगर आधारताल स्थित आकांक्षा गैस एजेंसी के संचालक सौरभ सिंह जाट, सदर स्थित गुजराल गैस एजेंसी की संचालक तविन्दर कौर गुजराल, राँझी स्थित उदयन गैस एजेंसी की संचालक नुपुर ठाकुर, एकता चौक विजय नगर स्थित दुबे गैस एजेंसी के संचालक गुलाब दुबे, मेन रोड चुंगी नाका राँझी स्थित ओम इंडेन गैस एजेंसी के संचालक अनिल रावतेल, स्टेशन रोड कांचघर स्थित साईं विश्वा गैस एजेंसी के संचालक विनीत कुमार वाजपेयीए कटंगा स्थित मित्तल गैस एजेंसी के पार्टनर शरद मित्तल तथा धुआंधार रोड भेडाघाट स्थित शंकर गैस एजेंसी के संचालक विनय शंकर श्रीवास्तव शामिल हैं।

कारण बताओ नोटिस में इन गैस वितरकों को तीन दिन के भीतर जबाब देने के निर्देश दिये गये हैं। तय समयावधि में तथा संतोषजनक जबाब प्रस्तुत नहीं किये जाने की स्थिति में एक पक्षीय कार्यवाही की चेतावनी भी इन रसोई गैस वितरकों को नोटिस में दी गई है। कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि इन गैस एजेंसियों के संचालक और उनके कर्मचारियों द्वारा कालाबाजारी कर अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से घरेलू रसोई गैस सिलेंडर का विक्रय किया जाना पाया गया है। 

कलेक्टर कार्यालय की खाद्य शाखा के अनुसार घरेलू रसोई गैस के दुरुपयोग को रोकने कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम गोरखपुर अनुराग सिंह द्वारा अनुविभागवार जांच दलों का गठन किया गया था। इन जाँच दलों में शामिल अधिकारियों द्वारा ग्राहक बनकर रसोई गैस वितरक एजेंसियों की जांच की गई थी। जाँच दल में शामिल अधिकारी खाली सिलेंडर लेकर रसोई गैस एजेंसी पहुँचे थे और भरे हुये सिलेंडर क्रय करने की मांग गैस एजेंसी के कर्मचारियों से की गई थी। 

जांच में दोषी पाए गई गैस वितरक एजेंसियों के कर्मचारियों द्वारा गैर पंजीकृत उपभोक्ता होने के बावजूद जांच अधिकारियों को निर्धारित दर 860 रुपये के स्थान पर एक हजार रुपये से 1हजार 400 रुपये लेकर प्रदान कर दिये गये। जांच दल के अधिकारियों द्वारा बकायदा इसके वीडियो बनाये गये और भुगतान भी यूपीआई के माध्यम से किया गया।

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