पीएफ के नियमों में बदलाव, 7.5 लाख तक के निवेश करमुक्त


जबलपुर/नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में प्रोविडेंट फंड ट्रस्ट से जुड़े टैक्स नियम आसान बनाने का प्रस्ताव रखा है। मकसद है- नियोक्ताओं, कर्मचारियों और पीएफ ट्रस्ट एडमिनिस्ट्रेटरों के बीच होने वाली उलझन कम करना। इसके लिए आयकर नियमों को अब ईपीएफ कानूनों के अनुरूप किया जाएगा। अब तक पीएफ ट्रस्ट इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत चलते थे, जबकि कर्मचारियों के पीएफ से जुड़े नियम कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 और ईपीएफ स्कीम 1952 के तहत तय होते हैं। दोनों कानूनों में अंतर होने से कई तरह की भ्रम की स्थिति बनती थी। यानी संक्षेप में कहें तो सरकार का यह कदम पीएफ सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और आसान बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

पहले थीं दिक्कतें ?

- पीएफ छूट पाने के अलग-अलग नियम

- निवेश के अलग मानदंड

- नियोक्ता के योगदान की कोई स्पष्ट सीमा नहीं

- अब क्या-क्या बदलेगा?

1. PF छूट के नियम

अब आयकर कानून के तहत मान्यता  सिर्फ उन्हीं पीएफ ट्रस्ट को मिलेगी, जिन्हें ईपीएफ एक्ट (की धारा 17 के तहत छूट मिली हो।

2. निवेश के नियम

पीएफ ट्रस्ट का निवेश अब पूरी तरह ईपीएफ नियमों के मुताबिक होगा। पहले सरकारी सिक्योरिटीज में 50% निवेश की सीमा थी, वह पाबंदी हटेगी।

3. नियोक्ता का योगदान

सालाना 7.5 लाख रुपए तक का नियोक्ता योगदान टैक्स-फ्री रहेगा। इससे ज्यादा राशि कर्मचारी के लिए टैक्स योग्य परक्विजिट मानी जाएगी।

सैलरी पाने वालों के लिए जरूरी बात

नियोक्ता अब बेसिक सैलरी का 12% से ज्यादा PF में जमा कर सकते हैं, लेकिन साल भर में कुल 7.5 लाख रुपए तक की रकम ही टैक्स फ्री रहेगी। इससे ज्यादा पर टैक्स देना होगा।

बदलाव का फायदा?

पीएफ ट्रस्ट एडमिनिस्ट्रेटर- विवाद और कानूनी झंझट कम होंगे।

नियोक्ता (कंपनियां) नियमों का पालन आसान होगा।

कर्मचारी- पीएफ और टैक्स को लेकर ज्यादा स्पष्टता और भरोसा मिलेगा

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