जबलपुर। पुणे पोर्श हिट-एंड-रन मामले में सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों,आदित्य अविनाश सूद, आशीष सतीश मित्तल और अमर संतोष गायकवाड को जमानत दे दी है। इन तीनों पर आरोप था कि इन्होंने मामले की जांच के दौरान साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की और आरोपियों के खून के नमूने बदलवाने में मदद की थी। इस अदालती फैसले के बाद अब यह तीनों आरोपी जेल से बाहर आ सकेंगे।
पीड़ित परिवार ने उठाए जांच पर गंभीर सवाल
जमानत की खबर मिलते ही जबलपुर की मृतिका अश्विनी कोष्टा के पिता ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। जबलपुर में रहने वाले पीड़ित परिवार का कहना है कि इन प्रभावशाली लोगों को जमानत मिलने से केस की निष्पक्षता खतरे में पड़ सकती है। पिता ने आशंका जताई है कि आरोपी जेल से बाहर आकर गवाहों को डरा-धमका सकते हैं और अपने रसूख व पैसों के दम पर सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इन पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
बहुत भयावह था वो हादसा
यह घटना 19 मई 2024 की है, जब पुणे में एक नशे में धुत नाबालिग ने अपनी तेज रफ्तार पोर्श कार से दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को कुचल दिया था। अश्विनी कोष्टा के पिता ने मांग की है कि इस केस को एक उदाहरण (नजीर) बनाया जाए। उन्होंने कार में पीछे बैठे अन्य साथियों पर भी कार्रवाई न होने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जघन्य अपराधों में शामिल नाबालिगों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलना चाहिए ताकि माफिया और रसूखदार लोग कानून का फायदा न उठा सकें।
