जबलपुर। केन्द्रीय रेल बजट 2026 के पेश होने के बाद रेल कर्मचारियों में असंतोष की लहर है। वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ ने बजट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे रेल कर्मियों के लिए निराशाजनक बताया है। संघ के प्रवक्ता सतीश कुमार ने जानकारी दी कि एनएफआईआर के संयुक्त महामंत्री व वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ के महामंत्री अशोक शर्मा ने बजट प्रावधानों पर गहरा क्षोभ प्रकट किया है।
संपत्तियों के विस्तार के बावजूद नई नियुक्तियों पर रोक
महामंत्री अशोक शर्मा का कहना है कि पिछले एक दशक में भारतीय रेलवे ने बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार किया है। लगभग 19 हजार किलोमीटर से ज्यादा नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं और पूरे रेलवे सिस्टम का शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन किया गया है, जिसके लिए बड़ी संख्या में टीआरडी एसेट्स और सिग्नलिंग यूनिट्स बनाई गई हैं। इसके अलावा सैकड़ों नई ट्रेनें और नए वर्कशॉप भी शुरू हुए हैं, लेकिन दुख की बात यह है कि इन नई संपत्तियों के रख-रखाव के लिए नए पदों का सृजन नहीं किया गया। वित्त मंत्रालय द्वारा नए पदों पर लगाई गई रोक के कारण सुरक्षा से जुड़ी श्रेणियों में भी भर्तियां नहीं हो पा रही हैं, जो कि चिंताजनक है।
8वें वेतन आयोग और एरियर की अनदेखी
संघ ने आरोप लगाया कि बजट में 8वें वेतन आयोग के गठन और उसके संभावित खर्चों को लेकर कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जिसे उन्होंने 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। इसके साथ ही, जनवरी 2020 से जून 2021 तक की 18 महीने की अवधि का फ्रीज किया गया महंगाई भत्ता और पेंशनभोगियों का महंगाई राहत का बकाया अभी तक जारी नहीं किया गया है। रेल कर्मियों को उम्मीद थी कि इस बजट में सरकार इस पुराने बकाये पर कोई सकारात्मक निर्णय लेगी, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी।
पुरानी पेंशन और अतिरिक्त पेंशन पर चुप्पी
बजट में पुरानी पेंशन योजना की बहाली को लेकर भी सरकार ने कोई रुख स्पष्ट नहीं किया है। साथ ही, संसदीय समिति द्वारा 65 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों को अतिरिक्त पेंशन देने की जो सिफारिश की गई थी, उसे भी इस बजट में नजरअंदाज कर दिया गया है। संघ के अनुसार, रेलवे के विस्तार के बीच कर्मचारियों के हितों की इस तरह की अनदेखी से रेल परिवार में भारी रोष व्याप्त है।
