जबलपुर। शहर के घंटाघर चौक पर आज ब्राह्मण, क्षत्रिय, अग्रवाल, वैश्य और जैन समाज सहित समस्त सवर्ण संगठनों ने यूजीसी के नए नियमों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को 'काला कानून' करार देते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। आंदोलन के बाद राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा गया, जिसमें कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।
सामाजिक समरसता को खतरे में डालने का आरोप
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कानून समाज में दूरियां पैदा करने वाला है। प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि सवर्ण छात्र अपने जिन साथियों के साथ मिल-बैठकर भोजन करते थे, इस कानून के आने के बाद उनके बीच दुश्मनी का भाव पैदा किया जा रहा है। संगठनों ने तर्क दिया कि यदि बराबरी करनी है, तो शिक्षा के क्षेत्र में योग्यता के आधार पर प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। उनके अनुसार, सवर्ण समाज के बच्चे अनुदान के बजाय अपने दम पर नौकरियां हासिल कर रहे हैं, ऐसे में शिक्षा को इस तरह के दमनकारी कानूनों से दूर रखा जाना चाहिए।
पुराने प्रावधानों को हटाने पर जताई आपत्ति
ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि गुड्डा त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2012 में भी यूजीसी के नियम लागू थे, लेकिन उनमें यह स्पष्ट प्रावधान था कि यदि कोई शिकायत झूठी पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता पर भी कार्रवाई होगी। वर्तमान कानून में इस सुरक्षा कवच के अभाव पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून सवर्ण समाज को अन्य जातियों पर अत्याचार के लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करता है, जो अनुचित है। उन्होंने सरकार की एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे की नीति पर भी तंज कसा।
1 फरवरी को देशव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी
सवर्ण संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि केंद्र सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन और उग्र होगा। इसका स्वरूप विध्वंसकारी भी हो सकता है। ब्राह्मण महासभा ने घोषणा की है कि 1 फरवरी को इस कानून के विरोध में देशभर में आंदोलन किया जाएगा, जिसे जबलपुर के सभी सवर्ण संगठनों का पूर्ण समर्थन प्राप्त रहेगा। इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से अनंत ब्राह्मण सभा, समस्त महिला मंडल, अग्रवाल संगठन, वैश्य संगठन, क्षत्रिय संगठन और जैन समाज के पदाधिकारी व सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में मांग की है कि जब तक उनकी बात नहीं मानी जाती, यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।

