जबलपुर: हाईकोर्ट परिसर में आदिवासी वकील से मारपीट, चीफ जस्टिस ने दिए जांच और CCTV सुरक्षित करने के आदेश,देखें वीडियो


जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जबलपुर परिसर में 13 जनवरी को एक आदिवासी अधिवक्ता के साथ हुई मारपीट और जातिवाद के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में ग्वालियर के वकील अनिल मिश्रा और उनके साथियों पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं।

विवाद की जड़ और आरोप


जानकारी के अनुसार, घटना 13 जनवरी की है जब हाई कोर्ट परिसर में अधिवक्ता रूपसिंह मरावी के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि ग्वालियर से आए वकील अनिल मिश्रा और उनके साथियों ने रूपसिंह मरावी के साथ न केवल धक्का-मुक्की की, बल्कि उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल भी किया। विवाद की शुरुआत कथित तौर पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर पर की गई अभद्र टिप्पणी और जातिवाद फैलाने की कोशिशों से हुई थी। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कुछ वकीलों ने मिलकर एक आदिवासी वकील को निशाना बनाया, जिससे कोर्ट परिसर का माहौल खराब हुआ।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

घटना के तुरंत बाद पीड़ित अधिवक्ता रूपसिंह मरावी ने जबलपुर के सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा एफआईआर (FIR) दर्ज न किए जाने पर वकीलों के एक गुट में भारी नाराजगी है। पुलिस की इसी सुस्ती को देखते हुए मामले में एक हस्तक्षेप याचिका भी दायर की गई है।

चीफ जस्टिस ने दिए जांच के आदेश 

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे चीफ जस्टिस के संज्ञान में लाया गया। चीफ जस्टिस ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट परिसर के उस दिन के सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सुरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की बात कही है। वकीलों के बीच हुए इस विवाद ने हाई कोर्ट की सुरक्षा और वहां के कार्य वातावरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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