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दुष्कर्म पीड़िता की इच्छा का सम्मान: एमपी हाईकोर्ट ने दी बच्चे को जन्म देने की अनुमति


जबलपुर। 
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक दुष्कर्म पीड़िता को मां बनने की अनुमति दे दी है, जिसने स्वयं गर्भपात कराने से इनकार कर दिया था। यह मामला तब चर्चा में आया जब 33 सप्ताह से अधिक की गर्भवती एक किशोरी के गर्भपात की अनुमति के लिए सिंगरौली की जिला सत्र न्यायालय द्वारा हाईकोर्ट को पत्र भेजा गया था। सिंगरौली जिला न्यायालय द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, पीड़िता के साथ हुए दुष्कर्म के संबंध में विद्यानगर थाने में मामला दर्ज किया गया था। चूंकि गर्भ 33 सप्ताह से अधिक का हो चुका था, इसलिए कानूनी रूप से उचित निर्देशों के लिए मामला उच्च न्यायालय भेजा गया। सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने मेडिकल बोर्ड के सामने पीड़िता और उसके माता-पिता के बयान दर्ज किए। किशोरी और उसके परिजनों ने स्पष्ट रूप से गर्भपात कराने से मना कर दिया और बच्चे को जन्म देने की इच्छा जताई। उनकी सहमति को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में डिलीवरी कराने के आदेश दिए।

कोर्ट ने तय की भविष्य की गाइडलाइंस

​कोर्ट ने अपने आदेश में कुछ महत्वपूर्ण शर्तें और निर्देश भी जारी किए हैं। डिलीवरी के बाद नवजात शिशु 15 दिनों तक किशोरी (मां) के पास ही रहेगा। यदि 15 दिनों के बाद किशोरी शिशु को अपने पास नहीं रखना चाहती, तो चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को शिशु को गोद देने की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।


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