पढ़ाई पर भारी 'सर्वे' की ड्यूटी: जब गुरुजी ही स्कूल में नहीं, तो कैसे पास होंगे बच्चे


जबलपुर।
बोर्ड परीक्षाओं की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आलम यह है कि जहां अब तक कोर्स पूरा होकर रिवीजन शुरू हो जाना चाहिए था, वहां कई स्कूलों में अब तक सिलेबस ही पूरा नहीं हो पाया है। इसका मुख्य कारण शिक्षकों की एसआईआर और बीएलओ कार्यों में लगाई गई ड्यूटी है। जिले के लगभग 100 से ज्यादा हाई और हायर सेकेंडरी शिक्षक पिछले कई महीनों से शैक्षणिक कार्यों को छोड़कर प्रशासनिक और सर्वे के कामों में उलझे हुए हैं।

अतिथि शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई

​अधिकारियों की बेरुखी और शिक्षकों की कमी का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। नियमित शिक्षकों के चुनाव और एसआईआर ड्यूटी में व्यस्त होने के कारण कई स्कूलों का संचालन पूरी तरह से अतिथि शिक्षकों के भरोसे छोड़ दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, पिछले ढाई महीने से कई मुख्य विषयों के शिक्षक स्कूलों से नदारद हैं। विशेष रूप से विज्ञान और हिंदी जैसे महत्वपूर्ण विषयों की कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। शिक्षकों के न होने से विद्यार्थियों का स्कूल से मोहभंग हो रहा है, जिसके कारण कक्षाओं में उपस्थिति (अटेंडेंस) में भारी गिरावट देखी जा रही है। छात्र अब खुद के भरोसे ही परीक्षा की तैयारी करने को मजबूर हैं।

एक्स्ट्रा क्लास का समय बीता, रिजल्ट बिगड़ने की आशंका

​सरकारी कैलेंडर के अनुसार, यह समय छात्रों की समस्याओं को दूर करने और एक्स्ट्रा क्लास लगाने का है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। एसआईआर का काम पिछले साल नवंबर से शुरू हुआ था, जिसका अर्थ है कि इस सत्र में स्कूलों में ठीक से छह महीने भी पढ़ाई नहीं हो सकी है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं और सारा दोष शासन स्तर के आदेशों पर मढ़ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस अव्यवस्था का सबसे बुरा असर गरीब वर्ग के बच्चों पर पड़ेगा, जिनके पास कोचिंग या निजी ट्यूशन के साधन नहीं हैं। यदि जल्द ही शिक्षकों को वापस स्कूलों में नहीं भेजा गया, तो इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

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