जबलपुर। हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की संदिग्ध मौतों का मामला अब कानूनी जांच के घेरे में है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने इस मामले में दायर नए आवेदन पर सुनवाई के लिए 28 जनवरी की तारीख तय की है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि विशेषज्ञों की टीम को फार्म हाउस भेजकर घोड़ों के स्वास्थ्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच दल के प्रवेश की मांग
जनहित याचिकाकर्ता सिमरन इस्सर की ओर से पेश आवेदन में कहा गया है कि पनागर स्थित फार्म हाउस में घोड़ों की स्थिति चिंताजनक है। याचिकाकर्ता के वकीलों ने तर्क दिया कि हाल ही में कुछ और घोड़ों की मौत हुई है जिसे केयरटेकर द्वारा छिपाया जा रहा है। कोर्ट से मांग की गई है कि याचिकाकर्ता, ब्रीडर और वेटनरी डॉक्टरों को तत्काल फार्म हाउस के निरीक्षण की अनुमति दी जाए, ताकि वहां मौजूद घोड़ों की वास्तविक संख्या और उनके स्वास्थ्य का परीक्षण हो सके।
केयरटेकर और याचिकाकर्ता के दावों में विरोधाभास
सुनवाई के दौरान फार्म हाउस के केयरटेकर सचिन तिवारी ने दावा किया कि वर्तमान में उनके पास 19 घोड़े हैं जो पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनके अनुसार 57 घोड़ों में से 19 की मौत हुई और 22 को बेच दिया गया है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता का आरोप है कि केयरटेकर यह जानकारी नहीं दे रहे हैं कि घोड़े किसे बेचे गए। संदेह जताया जा रहा है कि साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से घोड़ों की मौतों के आंकड़ों को कम करके पेश किया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी और क्रूरता का गंभीर आरोप
याचिका में इस पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अवैध सट्टेबाजी से जोड़ा गया है। आरोप है कि हैदराबाद के सुरेश पाल गुड्डू ने फिलीपींस में ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के जरिए घोड़ों पर सट्टा लगवाया था। शिकायत के बाद जब काम बंद हुआ, तो घोड़ों को लावारिस छोड़ दिया गया और साक्ष्य मिटाने के लिए उन्हें जबलपुर लाया गया। याचिका के अनुसार, समुचित भोजन और इलाज न मिलने के कारण अब तक लगभग 90 घोड़ों की जान जा चुकी है।
