बताया गया कि विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान पाया कि आश्रम में बच्चे मौजूद नहीं थे। जब उन्होंने इस बारे में छात्रावास अधीक्षक चैन सिंह चिढ़ार से जवाब मांगा तो अधीक्षक ने बताया कि क्षेत्र में चल रही शीतलहर के कारण दो दिन की छुट्टी घोषित की गई थी। इसलिए बच्चे अपने घर चले गए। यह जवाब सुनकर कलेक्टर गुप्ता इतने नाराज हुए कि उन्होंने वहां मौजूद अन्य अधिकारियों के सामने ही अधीक्षक को अपशब्द कहे और कहा कि अभी तुम्हें 2 जूते मारूंगा। कलेक्टर के इस व्यवहार से जिले के अन्य सरकारी कर्मचारियों में भी नाराजगी है। कुछ कर्मचारियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कलेक्टर भले ही जिले के मुखिया और वरिष्ठ अधिकारी हैं, लेकिन उन्हें मातहत कर्मचारियों के साथ मर्यादित व्यवहार करना चाहिए। कर्मचारियों का कहना है कि वे भी सरकारी सेवक हैं। इस तरह की अभद्र भाषा से उनके सम्मान को ठेस पहुंची है।
अधीक्षक बोले, ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं-
अपमान से दुखी होकर चिढ़ार ने मौके पर ही मुख्यमंत्री के नाम एक शिकायती पत्र तैयार किया है। कलेक्टर ने जिस अधीक्षक को जूते मारने की बात कही है, उसने मौके पर ही एक आवेदन मुख्यमंत्री के नाम लिखा है। उसका कहना है कि वह जल्दी मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें आवेदन सौंपेगा। उनसे शिकायत करेगा।
यह लिखा पत्र में-
7-1-2026 को शासकीय बालक आदिवासी आश्रम शाला उदयपुर के निरीक्षण के दौरान मुझसे पूछा गया कि बच्चे कहां हैं तो मैंने बताया कि बच्चे छुट्टी पर हैं तो कलेक्टर ने कहा कि छुट्टी किसने की। मैंने कहा 2 दिन की छुट्टी आपने ही दी है। इस पर कलेक्टर कहने लगे तुझे जूते मारूं क्या, मैं एससी वर्ग का कर्मचारी हूं। मेरे साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।
इस बात पर गुस्साए कलेक्टर, छुट्टी स्कूलों की थी छात्रावास की नहीं-
खबर है कि विदिशा कलेक्टर ने शीतलहर के कारण 7 और 8 जनवरी को नर्सरी से 5वीं तक स्कूलों की छुट्टी घोषित की थी। लेकिन छात्रावास के लिए छुट्टी के आदेश जारी नहीं किए गए थे। इसके बाद भी छात्रावास के अक्षीक्षक ने बच्चों को घर भेज दिया। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई।