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पीड़ित किसान खुद आगे आएं, संगठन की याचिका नामंजूर


धान भुगतान विवाद: हाईकोर्ट ने किसान संघ की जनहित याचिका में हस्तक्षेप से किया इनकार

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने किसानों को धान खरीद के न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान न होने के मामले में दायर एक जनहित याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह एक भुगतान संबंधी विवाद है और इसमें पीड़ित किसानों को स्वयं सामने आना चाहिए।

क्या है याचिका में मांग

​भारतीय किसान संघ द्वारा दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि पिछले दो सालों से किसानों को उनकी धान की फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि समय पर भुगतान न होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और सरकार का यह कदम पूरी तरह असंवैधानिक है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने याचिका पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने अदालत को बताया कि धान के भुगतान को लेकर वर्तमान में कोई भी विवाद लंबित नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि किसी किसान का भुगतान अभी भी बकाया है, तो वह सीधे संबंधित अधिकारियों के पास आवेदन कर सकता है। सरकार के इस आश्वासन और विवाद की व्यक्तिगत प्रकृति को देखते हुए हाईकोर्ट ने किसी भी प्रकार का निर्देश जारी करने से मना कर दिया और याचिका वापस लेने के आधार पर इसे खारिज कर दिया।

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