जबलपुर | मध्य प्रदेश में 'प्रमोशन में आरक्षण' को लेकर चल रहा कानूनी गतिरोध एक बार फिर चर्चा में है। मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट में इस मामले से जुड़ी 45 याचिकाओं पर होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई अपरिहार्य कारणों से टल गई। दरअसल, चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के उपलब्ध न होने के कारण मंगलवार की सुनवाई स्थगित करनी पड़ी। हाईकोर्ट द्वारा आज शाम तक अगली सुनवाई की नई तारीख घोषित की जा सकती है। शासन और कर्मचारी संगठनों, दोनों की नजरें अब कोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं।
खाली पड़े हैं हजारों पद, कर्मचारी परेशान
मध्य प्रदेश में पदोन्नति का मामला पिछले कई सालों से अधर में लटका हुआ है। इसके कारण प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में हजारों पद खाली पड़े हैं।कर्मचारियों के करियर की प्रगति रुकी हुई है, और कई कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।प्रशासनिक कार्यक्षमता पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।
2025 के नए नियमों पर भी कानूनी पेंच
राज्य सरकार ने इस गतिरोध को खत्म करने के लिए 'लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025' लागू किए हैं। लेकिन, इन नए नियमों को भी कर्मचारियों के विभिन्न वर्गों ने चुनौती दी है। याचिकाओं में नियमों की संवैधानिकता और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के पालन न होने का तर्क दिया गया है। इसी कानूनी लड़ाई के बीच 12 जनवरी को एक और नई याचिका सुरेश कुमार कुमरे की ओर से दाखिल की गई है। इस याचिका में भी 2025 के नियमों की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। यह याचिका जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच में सूचीबद्ध है।संभावना जताई जा रही है कि इसे भी मुख्य मामले (स्वाति तिवारी व अन्य) के साथ लिंक कर दिया जाएगा।
