जबलपुर। संस्कारधानी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट के समीप संचालित जिलैटिन फैक्ट्री एक बार फिर विवादों के घेरे में है। फैक्ट्री से निकलने वाले जहरीले और गंदे पानी को सीधे नर्मदा नदी में बहाए जाने की शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। नगर निगम कमिश्नर राम प्रकाश अहिरवार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भेड़ाघाट सीएमओ (मुख्य नगरपालिका अधिकारी) को विस्तृत जांच के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
बिना उपचार के बहाया जा रहा फैक्ट्रियों का कचरा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भेड़ाघाट चौराहे के पास स्थित जिलैटिन फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा नाला सीधे जीवनदायिनी नर्मदा नदी में मिल रहा है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब सामाजिक संगठन के सदस्यों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया। संगठन का आरोप है कि फैक्ट्री में जिलैटिन बनाने के लिए मृत जानवरों की हड्डियों का उपयोग किया जाता है। इन हड्डियों को धोने के बाद निकलने वाला दूषित और दुर्गंधयुक्त पानी बिना किसी ट्रीटमेंट (उपचार) के सीधे नदी के बहाव में छोड़ दिया जाता है। इस भयावह प्रदूषण को देखकर स्थानीय ग्रामीणों और दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों में भारी रोष और चिंता व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यह पानी न केवल जलीय जीवन के लिए घातक है, बल्कि लोगों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है। मोर्चा ने इस स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया और जल के नमूने एकत्र कर प्रशासन को सौंपे थे। इसी दबाव के चलते नगर निगम कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा गया, जिसके बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हुई है।
सैम्पलिंग कर जांच की जाएगी
भेड़ाघाट सीएमओ विक्रांत झारिया ने पुष्टि की है कि उन्हें कमिश्नर कार्यालय से जांच के निर्देश प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि अभी साइट का फिजिकल इंस्पेक्शन नहीं किया गया है, लेकिन अगले एक सप्ताह के भीतर टीम फैक्ट्री से निकलने वाले पानी की सैंपलिंग और जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपेगी। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
