जबलपुर | प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में 'विश्व ब्रेल दिवस' के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कॉलेज ने एक ऐतिहासिक घोषणा की कि महाकौशल कॉलेज प्रदेश का पहला ऐसा संस्थान बन गया है, जहाँ दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के असाइनमेंट और क्लास टेस्ट अब ब्रेल लिपि में लिए जाएंगे।
शिक्षा और आत्मनिर्भरता का आधार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और दिव्यांग प्रकोष्ठ प्रभारी प्रो. अरुण शुक्ल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रेल लिपि केवल अक्षर नहीं, बल्कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता का वास्तविक आधार है। उन्होंने जोर दिया कि तकनीकी नवाचारों के बीच भी ब्रेल की महत्ता कम नहीं हुई है।
समान अवसर और जागरूकता
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने कहा कि विश्व ब्रेल दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य दृष्टिबाधित समाज के लिए सूचना, संचार और शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित करना है। वहीं, डॉ. शिवेन्द्र परिहार ने बताया कि ब्रेल लिपि के माध्यम से विद्यार्थी स्वतंत्र रूप से नोट्स तैयार कर सकते हैं, जिससे उच्च शिक्षा और करियर की राह आसान होती है। इस अवसर पर महाविद्यालय के लगभग 42 दिव्यांग विद्यार्थियों के साथ-साथ डॉ. ज्योति जुनगरे, डॉ. अंजली कनौजिया, डॉ. महेन्द्र कुशवाहा, श्रीमती लल्ला बाई लोधी, डॉ. प्रज्ञा रामगिरी, डॉ. संज्ञा सिंह, डॉ. तरुणेन्द्र साकेत, मनीष गुजराती और बिजेन्द्र विश्वकर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
