महाकौशल में बड़ी राजनैतिक जमावट: जेडीए अध्यक्ष की 'हॉट सीट' पर अजय विश्नोई की ताजपोशी की तैयारी


मोहन सरकार की पहली सूची में नाम तय,जल्दी ऐलान की उम्मीद

जबलपुर। मध्य प्रदेश में निगम-मंडलों और विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने प्रशासनिक और राजनैतिक नियुक्तियों का खाका तैयार कर लिया है। खबर है कि जबलपुर विकास प्राधिकरण  के अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई के नाम पर सहमति बन चुकी है। संगठन और दिल्ली दरबार से मंजूरी मिलने के बाद इसी सप्ताह इस संबंध में आदेश जारी हो सकते हैं। फरवरी में आने वाली दूसरी सूची से पहले, इस पहली खेप में विश्नोई सहित कई दिग्गजों को पुनर्वासित किया जा रहा है।

अनुभव को सम्मान और क्षेत्रीय संतुलन

​मोहन सरकार की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य उन वरिष्ठ नेताओं को मुख्यधारा में वापस लाना है, जो मंत्री पद की रेस में होने के बावजूद कैबिनेट में जगह नहीं बना पाए थे। अजय विश्नोई का नाम इस सूची में सबसे ऊपर होने का बड़ा कारण उनकी महाकौशल की राजनीति में गहरी पैठ और लंबा प्रशासनिक अनुभव है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विश्नोई जैसे कद्दावर नेता को जेडीए जैसी संस्था की कमान सौंपने से जबलपुर के कार्यकर्ताओं में नया जोश आएगा और क्षेत्रीय विकास को एक अनुभवी नेतृत्व मिलेगा।

शहर के विकास और मास्टर प्लान पर फोकस

​जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की कुर्सी को सबसे महत्वपूर्ण सीटों में से एक माना जाता है क्योंकि शहर के विस्तार और मास्टर प्लान को लागू करने की जिम्मेदारी इसी विभाग के पास है। मेट्रो सिटी की ओर कदम बढ़ा रहे जबलपुर में बुनियादी ढांचे और बड़ी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। अजय विश्नोई चूंकि शहर की बारीकियों और विकास की जरूरतों को गहराई से समझते हैं, इसलिए उन्हें इस पद के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। उनके आने से अटकी हुई योजनाओं को प्रशासनिक गति मिलने की प्रबल संभावना है।

आगामी चुनौतियों के लिए राजनैतिक जमावट

​पार्टी की यह रणनीति मिशन 2026 और भविष्य के चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके तहत न केवल अनुभवी विधायकों को जिम्मेदारी दी जा रही है, बल्कि चुनाव हार चुके दिग्गज नेताओं को भी निगम-मंडलों में सेट किया जा रहा है। विश्नोई के साथ-साथ अर्चना चिटनीस और शैलेंद्र जैन जैसे नामों की चर्चा भी तेज है। इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा नेतृत्व गुटीय असंतोष को कम करने और प्रशासन पर जनप्रतिनिधियों का नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, ताकि आने वाले समय में सांगठनिक ढांचा और अधिक शक्तिशाली हो सके।

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