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मोहनलाल हरगोविंददास विरासत मामला: कोर्ट ने 1986 की वसीयत को माना वैध, नीना पटेल को मिला 51% मालिकाना हक


दशकों पुराना संपत्ति विवाद खत्म: डॉ. नीना पटेल बनीं मोहनलाल हरगोविंददास साम्राज्य की मुख्य वारिस

जबलपुर। जबलपुर के सुप्रसिद्ध उद्योगपति मोहनलाल हरगोविंददास की अकूत संपत्ति और बीड़ी साम्राज्य के मालिकाना हक को लेकर चल रहे दशकों पुराने कानूनी विवाद में न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने इस मामले में डॉ. नीना वी पटेल के पक्ष में फैसला देते हुए उन्हें विरासत में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी का कानूनी हकदार माना है।

1986 की वसीयत को मिली कानूनी मान्यता

​न्यायालय ने इस लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 1986 में तैयार की गई वसीयत को पूरी तरह वैध माना है। गौरतलब है कि इस मामले में असली वसीयत को दबाकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप लगे थे। अदालत के इस फैसले से अब संपत्ति के बंटवारे का मुख्य आधार 1986 की मूल वसीयत ही रहेगी, जिससे परिवार के अन्य सदस्यों के दावों पर बड़ा असर पड़ा है।

करोड़ों के अवैध ट्रांसफर पर लगी रोक

​संपत्ति विवाद के बीच विरासत की संपत्ति के अवैध हस्तांतरण की शिकायतों पर भी कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने आदेश जारी करते हुए करोड़ों रुपये के अवैध ट्रांसफर पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस निर्देश से उन संदिग्ध लेन-देन और संपत्तियों के हेरफेर पर विराम लग गया है जो विवाद के दौरान किए गए थे।

बीड़ी उद्योग की संपत्ति का विवाद

​मोहनलाल हरगोविंददास बीड़ी उद्योग न केवल मध्य प्रदेश बल्कि देश के प्रतिष्ठित व्यापारिक घरानों में से एक रहा है। परमानंद भाई पटेल के निधन के बाद से ही उनके उत्तराधिकारियों के बीच मालिकाना हक को लेकर खींचतान जारी थी। नीना पटेल को 51% हक मिलने के इस फैसले ने इस जटिल विरासत विवाद को एक नई दिशा दे दी है, जिसे व्यापारिक और कानूनी हलकों में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

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