निर्वाचन कार्य के अत्यधिक दबाव से कर्मचारी बेहाल, 36 ऑपरेटरों ने दी सामूहिक इस्तीफे की पेशकश
जबलपुर। मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान काम का बोझ अब कर्मचारियों की सहनशक्ति से बाहर होता जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि जबलपुर में निर्वाचन कार्य में जुटे 36 कंप्यूटर ऑपरेटरों और प्रोग्रामरों ने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के समक्ष सामूहिक इस्तीफे की पेशकश कर दी है। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले तीन महीनों से सुबह 9 बजे से रात 11 बजे तक बिना किसी अवकाश के काम कर रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है।
10 दिनों में 4 लाख सुनवाई का लक्ष्य,राजस्व अमले की टेंशन
प्रशासनिक अमले में मची इस खलबली का मुख्य कारण निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित की गई कठिन समय-सीमा है। जबलपुर जिले में अगले 10 दिनों के भीतर लगभग 4 लाख लोगों की अंतिम सुनवाई और नोटिस संबंधी प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेष रूप से पाटन विधानसभा क्षेत्र में संसाधनों की कमी के बीच इतने बड़े लक्ष्य को पूरा करना चुनौती बन गया है। इस स्थिति को देखते हुए एसडीएम और तहसीलदार संघ ने भी कलेक्टर को अपना मांग पत्र सौंपा है। राजस्व अधिकारियों का तर्क है कि आयोग के दिशा-निर्देशों में स्पष्टता न होने और संसाधनों के अभाव में इस भारी भरकम कार्य का निराकरण करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है।
कलेक्टर की समझाइश: जल्द तैनात होगा अतिरिक्त स्टाफ
कर्मचारियों और अधिकारियों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मोर्चा संभाला। उन्होंने अमले के साथ बैठक कर उन्हें प्रोत्साहित करने की कोशिश की और कहा कि वे स्वयं भी देर रात तक दफ्तर में रुककर काम की निगरानी कर रहे हैं। कलेक्टर ने स्वीकार किया कि वर्तमान में काम का दबाव अधिक है, लेकिन उन्होंने ऑपरेटरों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही नए कर्मियों की तैनाती की जाएगी ताकि मौजूदा स्टाफ का बोझ कम हो सके। हालांकि, ऑपरेटरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो वे काम बंद करने के लिए मजबूर होंगे।
सोशल मीडिया पर लामबंद हुए अधिकारी, पूरे प्रदेश में फैल सकता है विरोध
जबलपुर की यह घटना केवल एक जिले का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने पूरे मध्यप्रदेश के राजस्व अमले में असंतोष की लहर पैदा कर दी है। जबलपुर के अधिकारियों द्वारा साझा किया गया मांग पत्र अब सोशल मीडिया के विभिन्न समूहों पर वायरल हो रहा है, जिससे अन्य जिलों के कर्मचारी भी एकजुट होने लगे हैं। राज्य भर के राजस्व अधिकारियों और आईटी ऑपरेटरों का मानना है कि निर्वाचन आयोग की सख्त डेडलाइन और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। यदि आयोग ने जल्द ही समय-सीमा या कार्य के तरीकों में बदलाव नहीं किया, तो आने वाले दिनों में निर्वाचन संबंधी कार्यों में बड़ा गतिरोध पैदा हो सकता है।

