एमपी : सीधी कलेक्टर आफिस में पुलिस की वर्दी पहन पहुंचे आदिवासी-हरिजन, मचा हड़कम्प

सीधी. मध्य प्रदेश के सीधी कलेक्ट्रेट कार्यालय  में मंगलवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कई बुजुर्ग किसान सैनिकों की चाल में पुलिस की वर्दी पहनकर पहुंचे. खुद को सैनिक बताते हुए इन लोगों ने दावा किया कि उनकी नियुक्ति नई दिल्ली से हुई है और वे हरिजन व आदिवासी समाज की सुरक्षा के लिए संगठित होकर काम कर रहे हैं. इसके बाद उन्होंने सीधी के अपर कलेक्टर बीपी पांडे से मुलाकात कर अपनी मांगों से जुड़ा पत्र सौंपा.

इस दौरान संगठन क्षेत्र उपाध्यक्ष छोटेलाल सिंह टेकाम ने कहा, वे खेतों में रहते हैं तो किसान होते हैं, लेकिन खेत से बाहर निकलते ही जब किसी प्रकार की समस्या आती है तो उनकी मदद करने वाला कोई नहीं होता. इसी कारण हरिजन और आदिवासी समाज के लोग मिलकर संगठन के माध्यम से अपनी सुरक्षा खुद करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर प्रशासन उनकी समस्याएं नहीं सुनेगा तो वे स्वयं प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाएंगे और जरूरत पडऩे पर न्यायालय व हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे.

राजमाता फुलवा देवी ने दी वर्दी

जिला मंत्री पन्नालाल सिंह मरावी ने बताया कि यह वर्दी उन्हें राजमाता फुलवा देवी ने दी है, जो इस संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और नई दिल्ली में रहती हैं. उनके अनुसार जिले के दायित्व संगठन के सदस्यों को सौंपे गए हैं. उन्होंने कहा कि अत्याचार, भ्रष्टाचार और आपसी लड़ाई-झगड़ों को खत्म करना संगठन की पहली प्राथमिकता है. फिलहाल सिंगरौली जिले में 400 वर्दीधारी कार्यकर्ता बनाए जा चुके हैं, जबकि सीधी जिले से अभी 15 कार्यकर्ता जुड़े हैं, जो वर्दी पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंचे.

अपर कलेक्टर ने कहा- कोई भी हाथ में नहीं ले सकता कानून

अपर कलेक्टर बीपी पांडे ने संगठन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि फिलहाल उनकी संस्था पंजीकृत नहीं है, इसलिए वे किसी भी प्रकार का अवैधानिक कार्य नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि संगठन शांतिपूर्वक लोगों को समझा सकता है और उनकी बातें प्रशासन तक रख सकता है, लेकिन कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है और बिना पंजीकरण किसी भी संस्था को मान्यता नहीं दी जा सकती.

ये लोग पुलिस कर्मी बन पहुंचे थे कलेक्ट्रेट

कलेक्ट्रेट पहुंचे सदस्यों में पन्नालाल सिंह मरावी (जिला मंत्री), छोटेलाल सिंह टेकाम (क्षेत्र उपाध्यक्ष), बबन सिंह पोया (जिला अध्यक्ष), गुलाब सिंह नेताम (जिला उपसचिव), जगजाहिर सिंह नेटिया और लक्ष्मण सिंह शामिल रहे. यह पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और आमजन के बीच चर्चा का विषय बन गया है.

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