बड़ा झटका: फर्जी पत्रकार पास के साथ पकड़े गए यासीन मछली को हाईकोर्ट से राहत नहीं


विधानसभा फर्जी पार्किंग पास मामला: 
हाईकोर्ट ने की जमानत याचिका की खारिज

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विधानसभा सुरक्षा में सेंध लगाने और फर्जी पार्किंग पास का उपयोग करने के आरोपी यासीन अहमद उर्फ ‘मछली’ को करारा झटका दिया है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामला सीधे तौर पर विधानसभा की सुरक्षा से जुड़ा है, जो एक अति-संवेदनशील क्षेत्र है और इसके साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा और आपराधिक रिकॉर्ड बना आधार

​यह पूरा मामला भोपाल के अरेरा हिल्स थाने से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार, आरोपी यासीन अहमद ने एक निजी पोर्टल के संपादक गौरव शर्मा के नाम पर जारी ‘पत्रकार पार्किंग पास’ (क्रमांक 433) का अवैध रूप से उपयोग किया था। आरोपी ने इस पास में कथित तौर पर छेड़छाड़ की और इसे अपनी निजी गाड़ी (MP-04-ज़ेड एल-0999) पर लगाकर विधानसभा परिसर के आसपास आवाजाही की। जब इस जालसाजी की शिकायत हुई, तो पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

सरकारी वकील ने बताया लिस्टेड अपराधी

​सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को अदालत के समक्ष पेश किया और उसे एक 'लिस्टेड अपराधी' बताते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। हाईकोर्ट ने केस डायरी का अवलोकन करने के बाद माना कि किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी पास का उपयोग कर प्रतिबंधित या उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में प्रवेश करना सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी का आचरण और उसके खिलाफ दर्ज पिछले मामले उसे जमानत का पात्र नहीं बनाते। इस फैसले के बाद अब आरोपी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। पुलिस इस मामले में अब उन कड़ियों को जोड़ रही है कि आरोपी ने यह पास कैसे हासिल किया और इसके पीछे किसी बड़े गिरोह का हाथ तो नहीं है।

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