तुलाई हो गई पर पैसा कब? धान खरीदी केंद्रों पर भुगतान का कोई ठिकाना नहीं


जबलपुर। 
जबलपुर जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का अभियान अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर गया है। 1 दिसंबर से शुरू हुई यह प्रक्रिया आगामी 20 जनवरी तक चलनी है, लेकिन वर्तमान स्थिति किसानों के लिए चिंताजनक बनी हुई है। जिले के लगभग 87 केंद्रों पर धान की आवक तो तेज है, लेकिन खरीदी के बाद होने वाले भुगतान की गति बेहद धीमी है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

भुगतान की कोई समय-सीमा तय नहीं

​खरीदी केंद्रों पर धान की तुलाई (तौल) के बाद किसानों को पावती तो थमा दी जा रही है, लेकिन उनके बैंक खातों में राशि कब तक आएगी, इसका कोई स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं है। रबी सीजन की फसलों के लिए खाद-बीज और दैनिक खर्चों के लिए किसानों को तत्काल नकदी की जरूरत है, पर भुगतान में हो रही देरी ने उनके उत्साह को फीका कर दिया है।

अधिकारी झाड़ रहे पल्ला, किसान परेशान

​खबर के मुताबिक, खरीदी केंद्रों पर तैनात प्रबंधक और कर्मचारी नियमों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। किसानों का आरोप है कि गुणवत्ता, सिलाई और भंडारण की पूरी जवाबदेही उन्हीं पर डाल दी गई है। कई मामलों में किसानों को बैंक पासबुक, आधार कार्ड और ऋण पुस्तिका अपडेट कराने के नाम पर केंद्रों से वापस लौटाया जा रहा है, जिससे वे मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं।

तारीख बढ़ने की संभावना

​जिले में कुल 55,928 से अधिक किसानों ने धान विक्रय के लिए पंजीकरण कराया है। वर्तमान स्थिति और केंद्रों पर धान की भारी भीड़ को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि 20 जनवरी की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जिले के 87 केंद्रों पर 20 जनवरी 2026 तक खरीदी का लक्ष्य। तुलाई के बाद भुगतान में अनिश्चितता और बैंकों के चक्कर। दूसरे जिलों की धान को रोकने के लिए सीमा पर चेकिंग पॉइंट सक्रिय। किसान चाहते हैं कि भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी हो और समय-सीमा तय की जाए।

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