दिव्यांग बच्चों की मुस्कान दुनिया की हर मुश्किल को हरा सकती है: आरके दुबे


जबलपुर।
शहर स्थित वंदन पुनर्वास अनुसंधान संस्थान में 77वें गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान परिसर में ध्वजारोहण के साथ हुआ, जिसके पश्चात उपस्थित जनों ने राष्ट्रध्वज को सलामी दी और राष्ट्रगान के साथ देश की एकता व अखंडता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। इस गौरवशाली अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. आरके दुबे,एके सक्सेना (चीफ इंजीनियर), अभिजात कृष्ण त्रिपाठी, त्रिलोक मेहता नीता रजक और एडवोकेट संपूर्ण तिवारी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

दिव्यांग सेवा को सक्षमता और नवाचार से जोड़ने का आह्वान


कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ.आरके दुबे ने अपने प्रभावी उद्बोधन में कहा कि पिछले 23 वर्षों से यह संस्थान दिव्यांगता के अंधकार को सेवा के प्रकाश से मिटा रहा है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग सेवा अब केवल दया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अब समय सक्षमता का है। हमें इन बच्चों के भीतर छिपे कलाकार और खिलाड़ी को पहचानकर उन्हें आधुनिक चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा। हमारा लक्ष्य संस्थान को रिसर्च और इनोवेशन का केंद्र बनाना है, ताकि नई थेरेपी से इनका जीवन सुगम हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि बच्चों की मुस्कान दुनिया की हर मुश्किल को हरा सकती है।

पुरस्कारों से मिली पहचान और आत्मनिर्भरता का संकल्प

​संस्थान के पदाधिकारियों ने इसकी कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह आवासीय विद्यालय बौद्धिक एवं श्रवण बाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समर्पित है। मुख्यमंत्री उत्कृष्ट पुरस्कार और महर्षि दधीचि पुरस्कार मिलना संस्थान की निष्ठा का प्रमाण है। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का शाल एवं श्रीफल भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। इस दौरान संस्थान के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प लिया, जहाँ शारीरिक या बौद्धिक विशिष्टता के कारण कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।

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