नई दिल्ली. केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर है. बजट 2026 से पहले आठवें वेतन आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली में तेजी लाने के संकेत दे दिए हैं. इसी कड़ी में आयोग की प्रक्रियाओं पर निगरानी रखने के लिए चीफ विजिलेंस अधिकारी (सीवीओ) की नियुक्ति की गई है. यह कदम न केवल प्रशासनिक दृष्टि से अहम है, बल्कि इससे करोड़ों हितधारकों की उम्मीदें भी जुड़ी हुई हैं.
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रवीण वशिष्ठ को आठवें वेतन आयोग का चीफ विजिलेंस अधिकारी नियुक्त किया गया है. उनकी नियुक्ति 16 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी. आयोग के कामकाज में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिहाज से इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सैलरी और पेंशन से जुड़े अहम मुद्दों पर रखेंगे नजर
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर देशभर के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनर्स पर पडऩा तय है. फिटमेंट फैक्टर, नया बेसिक पे स्ट्रक्चर, विभिन्न भत्तों में बदलाव और पेंशन रिवीजन जैसे बड़े और संवेदनशील मुद्दे आयोग के एजेंडे में शामिल हैं. ऐसे में सीवीओ की नियुक्ति यह सुनिश्चित करेगी कि इन सभी पहलुओं पर निर्णय नियमों के तहत, बिना किसी पक्षपात या अनियमितता के लिए जाएं.
क्या होता है चीफ विजिलेंस अधिकारी का रोल?
चीफ विजिलेंस अधिकारी को किसी भी सरकारी संस्था या आयोग का वॉचडॉग माना जाता है. उनका मुख्य काम यह देखना होता है कि कहीं नियमों की अनदेखी, वित्तीय गड़बड़ी, भ्रष्टाचार या दबाव में निर्णय तो नहीं लिए जा रहे. फाइलों की प्रक्रिया, नियुक्तियां, टेंडर और वित्तीय फैसले- सभी पर सीवीओ की नजर रहती है. बड़े और नीतिगत फैसलों में उनकी भूमिका बेहद अहम होती है.
