30% तक दाम बढ़ाने की तैयारी में प्रशासन, समिति ने विभागों से मांगी जानकारी
जबलपुर। शहर के विस्तार और बढ़ते बुनियादी ढांचे के बीच अब जमीन की सरकारी कीमतों (गाइडलाइन) में बड़े उछाल की तैयारी है। जिला प्रशासन ने नई दरों को अंतिम रूप देने के लिए कवायद तेज कर दी है। पिछले साल की तरह इस बार भी गाइडलाइन में 10 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि प्रस्तावित की जा सकती है, जिससे आम आदमी के लिए घर का सपना और भी महंगा हो जाएगा।
आधा दर्जन विभागों से मांगा गया कुंडली, विकास कार्यों का होगा विश्लेषण
जिला उपपंजीयन समिति ने जमीन के नए दाम तय करने के लिए आधार जुटाना शुरू कर दिया है। इसके लिए एसडीएम, नगर निगम, टीएंडसीपी, जिला पंचायत, जेडीए, पीडब्ल्यूडी और हाउसिंग बोर्ड से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। समिति ने स्पष्ट किया है कि जिन क्षेत्रों में पिछले एक साल में बड़े विकास कार्य हुए हैं या नई सड़कें और सीवरेज लाइनें बिछाई गई हैं, वहां की दरों में विशेष संशोधन किया जाएगा।
200 डायवर्सन और 60 कॉलोनियां रडार पर, बाजार भाव बनेगा आधार
राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में 200 से अधिक भूमि डायवर्सन और 60 से ज्यादा नई कॉलोनियों को टीएनसीपी से मंजूरी मिली है। इन इलाकों में प्लॉट और मकान किस कीमत पर बेचे जा रहे हैं, इसकी पड़ताल की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि इन क्षेत्रों में वास्तविक बाजार दर सरकारी गाइडलाइन से काफी आगे निकल चुकी है, जिसे अब बराबर करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुस्त विभागों को अल्टीमेटम: 7 दिन में दें ब्यौरा वरना होगी कार्रवाई
नई गाइडलाइन को अंतिम रूप देने में विभागों की देरी आड़े आ रही है। नगर निगम, जिला पंचायत और सिंचाई विभाग समेत कई दफ्तरों ने अब तक स्वीकृत परियोजनाओं और निर्माण कार्यों की लोकेशन साझा नहीं की है। उपपंजीयन समिति ने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि एक सप्ताह के भीतर समस्त जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि जिला स्तर की बैठक आयोजित कर प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा सके।
बायपास और बाहरी इलाकों में सबसे ज्यादा बढ़ेंगे दाम
इस बार प्रशासन का विशेष फोकस शहर की सीमा, बायपास और प्रमुख मार्गों से सटे इलाकों पर है। यहाँ तेजी से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ी हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन उपनगरीय क्षेत्रों में गाइडलाइन दरें काफी कम हैं, जबकि विकास कार्यों के कारण कीमतें आसमान छू रही हैं। दरों में प्रस्तावित 30% की वृद्धि का सबसे सीधा असर रजिस्ट्री के समय लगने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ के रूप में जनता पर पड़ेगा।
