आपात स्थिति में बिना बाहरी मदद के शुरू होंगे पावर प्लांट, महाराष्ट्र ट्रांसको के साथ साझा अभ्यास रहा सफल
जबलपुर। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के पेंच जल विद्युत गृह, तोतलाडोह ने अपनी उच्च अभियान्त्रिकी दक्षता का प्रदर्शन करते हुए महाराष्ट्र राज्य विद्युत पारेषण कम्पनी के साथ सफलतापूर्वक ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल संपन्न की। यह अभ्यास राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के विफल होने जैसी आपातकालीन स्थितियों में बिजली आपूर्ति की त्वरित बहाली सुनिश्चित करने के लिए किया गया। इस दौरान पेंच जल विद्युत गृह से महाराष्ट्र के कोराडी, खापरखेड़ा और विदर्भ औद्योगिक ताप विद्युत गृहों तक एक विशेष आयलैंड बनाकर लगभग 5 हजार मेगावाट उत्पादन क्षमता को तकनीकी बैकअप प्रदान किया गया।
तकनीकी प्रक्रिया और मॉक ड्रिल के फैक्ट्स
यह सफल मॉक ड्रिल 21 जनवरी को सुबह 10:03 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक संचालित की गई। इस प्रक्रिया में पेंच जल विद्युत गृह से लगभग 20 मेगावाट विद्युत की आपूर्ति महाराष्ट्र के तीन प्रमुख ताप विद्युत गृहों को की गई। लगभग दो घंटे तक सिस्टम को स्थिर रखने के बाद, दोपहर 12:02 बजे पेंच विद्युत गृह को दोबारा राष्ट्रीय ग्रिड के साथ री-सिंक्रोनाइज किया गया। यह परीक्षण भारतीय विद्युत ग्रिड संहिता 2020 के अनिवार्य प्रावधानों के तहत किया गया, ताकि पूर्ण ब्लैकआउट की स्थिति में सिस्टम को बाह्य सहायता के बिना स्व-प्रारंभ किया जा सके।
क्षेत्रीय सुरक्षा में पेंच जल विद्युत गृह की भूमिका अहम
मध्य भारत और विदर्भ क्षेत्र के लिए 160 मेगावाट क्षमता का पेंच जल विद्युत गृह सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस क्षेत्र में यह एकमात्र प्रमुख जल विद्युत स्रोत है जो ब्लैक स्टार्ट सक्षम है। ग्रिड फेल होने की स्थिति में आर्थिक और सामाजिक क्षति को कम करने के लिए जल विद्युत केंद्रों की भूमिका अहम होती है, क्योंकि इन्हें डीजल जनरेटर जैसे स्थानीय स्रोतों से तुरंत शुरू किया जा सकता है। पेंच की इस सफलता ने साबित किया है कि यह आपातकाल में बड़े ताप विद्युत केंद्रों को पुनर्जीवित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
जेनको के लिए बड़ी उपलब्धि:मनजीत सिंह
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह और डायरेक्टर टेक्निकल सुबोध निगम ने पूरी टीम को बधाई दी है। इस जटिल तकनीकी अभ्यास को सफल बनाने में अधीक्षण अभियंता एसएस ठाकुर सहित सहायक अभियंता अरुण मुंगोले, निकलेश नागदौने, विजय आहाके, आरके धुये, आरपी वारकड़े और रूपेश ताकितकर का विशेष योगदान रहा। इन सभी कार्मिकों के आपसी समन्वय और तकनीकी निपुणता के कारण ही निर्धारित समय-सीमा के भीतर इस संवेदनशील प्रक्रिया को तकनीकी मानकों के अनुरूप पूरा किया जा सका।
