संकट में बरगी बांध! रिसाव रोकने के लिए बुलाई गई मुंबई की हाई-टेक टीम


राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के नोटिस के बाद एक्टिव हुए अफसरान

जबलपुर। मध्य प्रदेश की जीवनरेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 35 साल पुराने इस बांध की दीवारों में हो रहे निरंतर रिसाव (सीपेज) ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इस समस्या की गहराई और कारणों का सटीक पता लगाने के लिए अब नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने मुंबई से एक विशेषज्ञ अंडरवॉटर इन्वेस्टिगेशन टीम को बुलाया है। यह टीम आधुनिक मशीनों के साथ पानी की गहराई में उतरकर बांध के स्वास्थ्य का परीक्षण करेगी।

-​सतही जांच में नहीं मिल रहे सुराग

​प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, अब तक की गई सतही जांचों में रिसाव के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। वर्तमान में बांध की दीवारों, उनके जोड़ों और नींव की बारीकी से जांच करना अनिवार्य हो गया है। मुंबई से आने वाले एक्सपर्ट्स पानी के भीतर जाकर यह देखेंगे कि किन हिस्सों में दरारें आई हैं और पानी का दबाव संरचना को किस तरह प्रभावित कर रहा है। जांच के बाद विशेषज्ञों की टीम एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें रिसाव रोकने के लिए अपनाई जाने वाली आधुनिक तकनीकों और अनुमानित लागत का विवरण होगा।

-​अत्याधुनिक तकनीक से होगा परीक्षण

​बांध की जांच के लिए चार प्रमुख वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जाएगा।विशेषज्ञ इंजीनियर सुरक्षा उपकरणों के साथ पानी के भीतर जाकर दीवारों के जोड़ों और नींव का निरीक्षण करेंगे। अत्यधिक गहराई या जोखिम भरे हिस्सों में रिमोट कंट्रोल रोबोट भेजे जाएंगे, जो कैमरों और सेंसर की मदद से संकरी जगहों की फुटेज लेंगे। इस तकनीक से पानी के भीतर संरचना की मैपिंग की जाएगी, जिससे नींव के नीचे मिट्टी के बहाव या खोखलेपन का पता चल सकेगा। बांध में लगे उपकरणों के माध्यम से पानी के दबाव और रिसाव की गति का आकलन कर भविष्य के खतरे का पूर्वानुमान लगाया जाएगा।

​-नोटिस के बाद सक्रिय हुए अफसर

​बरगी बांध जबलपुर, मंडला और आसपास के जिलों के लिए सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन का प्रमुख स्रोत है। बांध की संरचनात्मक मजबूती से कोई भी समझौता क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री राजेश सिंह ने बताया कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही मरम्मत कार्य के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। इस बार प्रशासन का ध्यान अस्थायी सुधार के बजाय दीर्घकालिक समाधान खोजने पर है।​ गौरतलब है कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण ने भी पूर्व में बांध सुरक्षा अधिनियम के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किया था, जिसके बाद से सुधार की प्रक्रिया में तेजी आई है।

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