पटना. रेलवे प्रोजेक्ट में घूसखोरी कांड में गिरफ्तारी किए गए चीफ इंजीनियर समेत चार आरोपियों से सीबीआई की टीम पूछताछ कर रही है। पटना कोर्ट से सीबीआई को इन आरोपियों की सात दिनों की रिमांड मिली है। घूसकांड के आरोपी चीफ इंजीनियर और कंपनी के अधिकारियों को आमने-सामने बैठा कर पूछताछ कराया जा रहा है।
शुरुआती पूछताछ और जांच में सीबीआई को कई अहम साक्ष्य हाथ लग हें। इतना ही नहीं इस पूरे घूसखोरी नेटवर्क में शामिल अन्य कई अधिकारियों और पदाधिकारियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। अब सीबीआई की एक टीम पुराने फाइलों को भी खंगाल रही है। सूत्रों की मानें तो इस घूसकांड में शामिल कई अधिकारी और कर्मचारी सीबीआई की रडार पर हैं। सबकी कुंडली खंगाली जा रही है।
सीबीआई की अलग-अलग टीम ने छापेमारी की
बता दें कि एक दिन पहले महेंद्रूघाट स्थित मध्य रेलवे निर्माण कार्यालय, डेहरी ऑन सोन के कार्यालय समेत 12 से अधिक जगहों पर सीबीआई की अलग-अलग टीम ने छापेमारी की थी। इस दौरान टीम को 45 लाख कैश मिले थे। सीबीआई ने मामले में प्राइवेट कंपनी के एमडी अनुप सिंह, एएमडी गौरव कुशवाहा, अकाउंटेंट आकाश पात्रा और धीरज विरमानी को गिरफ्तारी किया है। साथ ही पूर्व मध्य रेवले निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अनिल कुमार समेत 11 लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज करते हुए आरोपी बनाया है।
बिल भुगतान स्वीकृत कराने के एवज में दी रिश्वत
सीबीआई के अनुसार, आरोप है कि गिरफ्तार किए गए इन अभियुक्तों ने निर्माण कार्यों का बिल भुगतान स्वीकृत कराने के एवज में संबंधित अधिकारियों को लाखों रुपये की रिश्वत दी। पिछले कई महीनों से सीबीआई की टीम इस घूसखोरी कांड की जांच कर रही है। इसमें यह बात सामने आई कि निर्माण कार्य में रेल निर्माण भवन के अधिकारियों और निजी कंपनी आपस में अवैध लेन देन कर रहे थे। इसके बाद सीबीआई की टीम ने जाल बिछाकर छापेमारी की और आरोपी निजी कंपनी के बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार किया और रेलवे के मुख्य अभियंता सहित 11 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया है। सीबीआई ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों को विशेष अदालत में पेश भी कर दिया। इसके बाद कोर्ट से इन्हें सात की रिमांड मिली
