दूसरे की जमीन को अपना बताकर बैंक से हड़पे लाखों, अब 10 साल सलाखों के पीछे काटेंगे दो दोषी


जबलपुर। 
फर्जी दस्तावेज तैयार कर दूसरे की जमीन पर बैंक लोन लेने के मामले में माननीय न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। थाना अधारताल के धोखाधड़ी प्रकरण में ठोस विवेचना और पैरवी के कारण अदालत ने जमीन हड़पने और बैंक को चूना लगाने के दो मुख्य सहयोगियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। शिकायतकर्ता गौरव प्रसाद तिवारी (निवासी रिछाई रांझी) के दादा गौरीशंकर तिवारी के नाम पर ग्राम बघेली में 2.760 हेक्टेयर जमीन दर्ज थी। दादाजी की मृत्यु 2013 में होने के बाद, जब गौरव 2019 में खसरे की नकल लेने तहसील कार्यालय पहुंचा, तो उसे पता चला कि इस जमीन पर आईसीआईसीआई बैंक से 4,08,100 रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड लोन लिया जा चुका है।बैंक से जानकारी जुटाने पर खुलासा हुआ कि गौरी शंकर यादव और उसकी पत्नी रेखा यादव ने मृतक की जमीन को अपना बताकर फर्जी दस्तावेज पेश किए थे। इस धोखाधड़ी में राजकुमार यादव और विजय मिश्रा ने जमानतदार बनकर षड्यंत्र को अंजाम देने में सक्रिय सहयोग किया था।

गवाहों ने पुख्ता किया फैसला

​शिकायत की जांच के बाद थाना अधारताल में अपराध क्रमांक 375/2019 के तहत धारा 420, 467, 468, 471, 120बी और 34 भादवि के तहत मामला दर्ज किया गया। उप निरीक्षक टेकचंद शर्मा ने मामले की गहराई से विवेचना की और आरोपी राजकुमार यादव एवं विजय कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया। पुलिस ने समय पर साक्षियों को न्यायालय में प्रस्तुत कर अभियोजन के पक्ष को मजबूती दी। प्रकरण की पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक  अरविंद जैन द्वारा की गई। साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर श्रीमती प्रीति शिखा अग्निहोत्री (तेईसवें अपर सत्र न्यायाधीश) ने  आरोपियों को सजा सुनाई। आ​रोपी राजकुमार यादव (62 वर्ष): निवासी सुभाष नगर महाराजपुर, थाना अधारताल व ​विजय कुमार यादव (55 वर्ष): निवासी कांचघर, स्टेशन रोड, थाना घमापुर को ​धारा 467, 471 भा.द.वि.: 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड व ​धारा 420, 468, 120बी भा.द.वि.: 7-7 वर्ष का सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस फैसले को धोखाधड़ी करने वाले भू-माफियाओं और उनके मददगारों के खिलाफ एक बड़ी नजीर माना जा रहा है।

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