रेलवे बोर्ड का निर्देश : विजिलेंस जांच में लापरवाही नहीं चलेगी, जीएम को देना होगी स्पष्ट 5 रिपोर्ट

नई दिल्ली. किसी रेल कर्मचारी या अधिकारी के विरुद्ध विजिलेंस जांच शुरू हुई तो क्लीन चिट या दोषारोपण की स्पेशल पांच रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है, ताकि दोषी को सजा दिलाई जा सके। रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर विजिलेंस (ई) अलिंद शेखर द्वारा हस्ताक्षरित पत्र सभी जोन को भेज कर कहा है कि जीएम को किसी भी केस को बोर्ड को भेजने से पहले पांच मुख्य बिंदुओं पर स्पष्ट सिफारिश देनी होगी।

इसमें संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की कितनी और कैसी जिम्मेदारी है? दोषी को बड़ी सजा मिलनी चाहिए, छोटी सजा या केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त है। क्या मामले में भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग की मंशा थी? विजिलेंस एंगल की मौजूदगी पर स्पष्ट राय देना अनिवार्य है। यदि मामला गंभीर है, तो क्या इसे सीबीआई जैसी बाहरी एजेंसी को सौंपने की आवश्यकता है? इसके लिए ठोस तर्क देने होंगे। यदि किसी निजी ठेकेदार या कंपनी की भूमिका संदिग्ध है, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट या डी-लिस्ट करने का प्रस्ताव भी रिपोर्ट का हिस्सा होना चाहिए। इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी एसडीजीएम की होगी, वह पूर्ण फाइल ही जीएम को सौंपेंगे।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

बोर्ड ने विजिलेंस जांच रिपोर्ट भेजने की प्रक्रिया में बरती जा रही कमियों पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए सभी जोनल रेलवे और प्रोडक्शन यूनिट्स को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भेजी जाने वाली फर्स्ट स्टेज एडवाइस (एफएसए) की फाइलें तभी स्वीकार की जाएंगी, जब वे निर्धारित नियमों पर पूरी तरह खरी उतरेंगी।

अधूरी जानकारी पर जताई चिंता

रेलवे बोर्ड के सतर्कता निदेशालय द्वारा जारी इस पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में कई जोनल रेलवे से ऐसी जांच रिपोर्टें प्राप्त हुई हैं, जिनमें जनरल मैनेजर की टिप्पणियां स्पष्ट नहीं थीं। भारतीय रेलवे सतर्कता नियमावली के पैरा 525.4 के तहत कुछ अनिवार्य बिंदुओं का पालन नहीं किया जा रहा था, जिससे मामलों के निपटारे में देरी हो रही थी।

एसडीजीएम की बढ़ी जिम्मेदारी

बोर्ड ने निर्देश दिया है कि सीनियर डिप्टी जनरल मैनेजर (एसडीजीएम) की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि वे फाइल को जनरल मैनेजर के समक्ष प्रस्तुत करते समय इन सभी आवश्यकताओं को पूरा सुनिश्चित करें। इसका उद्देश्य यह है कि जब मामला रेलवे बोर्ड के पास पहुंचे, तो वह पूरी तरह से पूर्ण हो और उस पर त्वरित निर्णय लिया जा सके।

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