जबलपुर। शहर के पॉश इलाके राइट टाउन में रहने वाली 81 वर्षीय नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव का मामला अब प्रशासनिक लापरवाही और पारिवारिक साजिश का एक दहला देने वाला दस्तावेज बन गया है। 14 जनवरी को प्रशासन को भेजे गए एक पत्र ने अब यह साफ कर दिया है कि यह केवल संपत्ति का विवाद नहीं, बल्कि एक बुजुर्ग महिला की आजादी और सुरक्षा पर सीधा हमला है। डॉ. हेमलता ने कलेक्टर और एसपी को भेजे पत्र में अपनी सगी बहन शांति तिवारी और बहनोई कृष्ण राजेंद्र तिवारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा था कि उनकी बीमारी और चलने-फिरने की लाचारी का फायदा उठाकर उन्हें अपने ही घर में बाहरी दुनिया से काट दिया गया है। पत्र के अनुसार, उन्हें न तो पड़ोसियों से मिलने दिया जा रहा है और न ही उनके वफादार कर्मचारियों से, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का संकेत देता है।
करोड़ों का लेन-देन और मानसिक शोषण
पत्र में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी जानकारी के बिना उनकी करोड़ों की संपत्ति का सौदा किया गया है। उनकी बहन और बहनोई ने उनकी पीठ पीछे कई लोगों से भारी-भरकम राशि का लेन-देन किया। डॉक्टर का आरोप है कि उन्हें न केवल आर्थिक रूप से ठगा गया, बल्कि इस उम्र में भारी मानसिक प्रताड़ना भी दी जा रही है।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 14 जनवरी 2026 को लिखित चेतावनी मिलने के बावजूद पुलिस और प्रशासन ने कोई कदम क्यों नहीं उठाया? 16 दिन बीत जाने के बाद भी किसी जांच का न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। अब जब मामला सोशल मीडिया पर वायरल है, तब जाकर सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने डॉ. श्रीवास्तव की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर दबाव बनाना शुरू किया है। इस मामले में फिलहाल जिला प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
