जबलपुर। मध्य प्रदेश में पिछले 9 वर्षों से लंबित पदोन्नति में आरक्षण का मामला एक बार फिर गरमा गया है। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में इस संवेदनशील विषय पर अहम सुनवाई हुई। इस दौरान अजाक्स संघ ने मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए आरक्षित वर्ग के हितों की रक्षा की मांग की और विपक्षी संगठन सपाक्स के दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
9 साल का लंबा इंतजार और अजाक्स की मांग
सुनवाई के दौरान अजाक्स संघ की ओर से दलील दी गई कि प्रदेश में प्रमोशन रुकने के कारण आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों का भारी नुकसान हो रहा है। संघ ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में पिछले 9 वर्षों से प्रमोशन अटके हुए हैं, जिससे हज़ारों कर्मचारी बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जरूरी सुधार और डेटा विश्लेषण के बाद तत्काल पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। प्रमोशन में आरक्षण न मिलने से प्रशासनिक ढांचे में आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो रहा है।
सपाक्स का ओवर रिप्रजेंटेशन दावा खारिज
पदोन्नति नियमों को चुनौती देने वाले सपाक्स संगठन ने कोर्ट में तर्क दिया था कि आरक्षित वर्ग का पदों पर 'ओवर रिप्रजेंटेशन' (अधिक प्रतिनिधित्व) है। इस पर पलटवार करते हुए अजाक्स ने स्पष्ट किया कि यह दावा तथ्यों से परे है। अजाक्स ने कहा कि बैकलॉग पदों और वर्तमान रिक्तियों को देखते हुए आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व अभी भी निर्धारित सीमा से कम है, इसलिए प्रमोशन में आरक्षण की प्रक्रिया संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।
हाई कोर्ट ने तय की अगली तारीख
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 13 जनवरी 2026, दोपहर 12 बजे का समय तय किया है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार द्वारा पेश किए गए क्वांटिफायबल डेटा (संख्यात्मक आंकड़ों) पर विस्तृत चर्चा हो सकती है।
