जबलपुर। विद्युत कंपनियों के रामपुर परिसर स्थित 55 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक 'जलपरी' झील को पर्यावरणीय संरक्षण और सौंदर्य की दृष्टि से नया स्वरूप दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने इस दिशा में एक नई पहल करते हुए झील में 12 बत्तखों (सात नर और पांच मादा) को मुक्त विचरण के लिए छोड़ा है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह द्वारा शुरू की गई इस पहल से अब यहां आने वाले पर्यटक और स्थानीय निवासी सुबह से शाम तक बत्तखों को जलक्रीड़ा करते देख सकेंगे।
सुरक्षा और देखभाल के पुख्ता इंतजाम
बत्तखों के संरक्षण के लिए सिविल परियोजना कार्यालय को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनकी देखरेख के लिए दो विशेष कर्मियों की नियुक्ति की गई है, जो प्रतिदिन सुबह बत्तखों को पिंजरों से मुक्त करेंगे और शाम को सुरक्षित वापस लाएंगे। सर्वाहारी होने के कारण ये बत्तखें झील के छोटे कीड़ों और वनस्पतियों का सेवन करेंगी, जबकि उनके अतिरिक्त भोजन के रूप में गेहूं, धान और चावल की व्यवस्था भी की गई है।
जल स्तर बनाए रखने की आधुनिक तकनीक
सिविल परियोजना विभाग के प्रयासों से अब जलपरी झील भीषण गर्मी में भी नहीं सूखती। इंजीनियरों ने सड़क के दूसरी ओर स्थित एक पुराने बंद कुएं को रिचार्ज कर उसे पुनर्जीवित किया है। यहां 5 एचपी का पंप लगाकर पाइपलाइन के जरिए अप्रैल से जून माह तक प्रतिदिन चार घंटे पानी की सप्लाई की जाती है। इस निरंतर जल आपूर्ति से न केवल मछलियां जीवित रहती हैं, बल्कि गर्मी में प्रवासी पक्षियों का आगमन भी बना रहता है।
ठाकुरताल से जुड़ा है इतिहास
वर्ष 1960 में विद्युत मंडल मुख्यालय की स्थापना के दौरान विकसित हुई यह झील प्राकृतिक रूप से ठाकुरताल के कैचमेंट एरिया का हिस्सा है। बारिश के दौरान ठाकुरताल का ओवरफ्लो और शक्तिभवन की सड़कों का पानी ढलान के जरिए इसी झील में एकत्रित होता है। झील के बीच स्थित जलपरी की प्रतिमा और अब बत्तखों के आगमन ने इसे शहर का एक प्रमुख दर्शनीय स्थल बना दिया है।
