सीएमपीएफ आयुक्त को हाईकोर्ट का अल्टीमेटम: 11 फरवरी को हाजिर हों, वरना जारी होगा गिरफ्तारी वारंट


जबलपुर।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के परिवार को न्याय दिलाने में हो रही अत्यधिक देरी पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया है। माननीय न्यायमूर्ति मनिंदर एस भट्टी की एकल पीठ ने कोल माइंस प्रॉविडेंट फंड, जबलपुर के क्षेत्रीय आयुक्त को 11 फरवरी, 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आयुक्त उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है।

लिपिकीय त्रुटि और दोहरे खाते का विवाद

​यह पूरा मामला शहडोल जिले के धनपुरी निवासी विमला बाई (57 वर्ष) से जुड़ा है, जो अपने दिवंगत पति स्वर्गीय संपत के हक की लड़ाई लड़ रही हैं। संपत ने 1972 में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेडकी धनपुरी खदान में स्वीपर के पद पर कार्य शुरू किया था और 2012 में रिटायर हुए। विभाग की एक लिपिकीय गलती के कारण उनके नाम पर दो अलग-अलग खाते (1972 और 1981) खुल गए। इस त्रुटि के कारण विभाग ने 1972 से 1981 के बीच के उनके योगदान, ग्रेच्युटी और अन्य लाभों की गणना ही नहीं की, जिससे याचिकाकर्ता को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

2022 के अदालती आदेश की अवहेलना पर नाराजगी

​सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि 23 फरवरी, 2022 को भी हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट आदेश दिया था। उस समय आयुक्त कार्यालय ने स्वीकार किया था कि दो खाते होने की वजह से 1974 से 1981 तक का अंशदान अपडेट नहीं हो पाया था। तब अदालत ने चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने और अनुपालन हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया था। हालांकि, 2026 तक भी इस आदेश का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया, जिसे अदालत ने अत्यंत गंभीर माना है।

 आयुक्त की हाजिरी और गिरफ्तारी की चेतावनी

​अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए अब सीधे विभाग के शीर्ष अधिकारी की जिम्मेदारी तय की है। एकल पीठ ने निर्देश दिया है कि सीएमपीएफ जबलपुर के क्षेत्रीय आयुक्त को अगली सुनवाई की तारीख, यानी 11 फरवरी 2026 को स्वयं कोर्ट रूम में मौजूद रहकर स्पष्टीकरण देना होगा। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि विभाग की कार्यप्रणाली के कारण एक गरीब विधवा महिला को अपने वैध अधिकारों के लिए वर्षों भटकना पड़ रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।

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