
सरकारी चिकित्सकों की पर्ची बनाएगा कम्प्यूटर, पायलट प्रोजेवट में जबलपुर शामिल
जबलपुर। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मुश्किल से पढ़ आने वाली हैंडराइटिंग अब मरीजों के लिए समस्या नहीं बनेगी। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसकी शुरुआत जबलपुर से होगी, जहाँ ओपीडी में डॉक्टर अब पर्चे हाथ से लिखने के बजाय कंप्यूटर पर टाइप करेंगे। इससे न केवल मरीजों को स्पष्ट और साफ पर्ची मिलेगी, बल्कि दवाइयों और जांचों को लेकर होने वाली गलतफहमियाँ भी खत्म होंगी। डॉक्टरों के अनुसार, पारंपरिक तरीके से लिखे गए पर्चे कई बार फार्मासिस्ट और मरीज दोनों के लिए समझ पाना मुश्किल होते हैं, जिससे दवाई लेने में गलती का जोखिम बढ़ जाता है।
अब ऐसे मिलेगी दवाई की पर्ची
नई व्यवस्था में प्रिस्क्रिप्शन सीधे प्रिंट होकर मरीज को दिया जाएगा। इससे डॉक्टरों का समय भी बचेगा और उपचार प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।यह प्रणाली अस्पताल के चिकित्सकों को विशेष ट्रेनिंग देने के बाद शुरू की जाएगी। कंप्यूटर पर दर्ज किए जा रहे डेटा को अस्पताल की अन्य सेवाओं से भी जोड़ा जाएगा, ताकि मरीजों का मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहे।
गलत दवा देने की आशंका पर विराम
सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा के अनुसार प्रदेश भर के सभी जिला अस्पतालों में यह डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन मॉडल चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसका लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, तेज और पारदर्शी बनाना है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल पर्ची से गलत दवा देने की आशंका लगभग समाप्त हो जाएगी और मरीज भी आसानी से डॉक्टर की सलाह पढ़ सकेंगे।स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह कदम मरीजों की सुविधा, सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता, तीनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।