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टनों से बिक गया ' पाकिस्तानी ' छुहारा, गुजरात के सौदागर टैक्स विभाग को लगा गए चूना, देखें वीडियो


जबलपुर।
जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की बेरूखी से गुजरात के सौदागर टनों से पाकिस्तान के छुहारे को मनमाने दाम पर बेचकर निकल गए। इन सौदागरों ने तो सरकार को टैक्स दिया और न ही परिवहन कर चुकाया। गाड़ी में माल भरा और शहर के जहां-तहां सड़क पर 150 रूपए प्रति किलो के हिसाब से छुहारा बेच दिया। जानकार कहते हैं कि पैकेट में न तो कोई लेबल था और न ही उसके सप्लाई करने की कोई तिथि अंकित थी।


शहर के पिसनहारी की मढ़िया, सदर, रांझी, मेडिकल, घमापुर, अधारताल सहित अलग-अलग हिस्सों में गुजरात पासिंग मालवाहकों में छुहारा भरकर खुलेआम उसका विक्रय किया गया है। शहर में यह विक्रय दो दिनों से चल रहा था। इन सौदागरों का निशाना सड़क पर चलने वाले लोग रहे। इन लोगों ने मालवाहक क्रमांक जीजे
27 टीटी 6739 और जीजे 01 टीएच 5190 में भरे छुहारे को बेचने के लिए किसी दुकानदार से संपर्क नहीं किया।

अमानक पॉलीथिन में था पैक

जानकारों का कहना था कि छुहारा अमानक पॉलीथिन में पैक था। इस पन्नी में लेबल नहीं था और न ही विक्रयदाता का नाम था। मौके पर एक पॉलीथिन खुली हुई थी, जिससे छुहारा टेस्ट कराया जाता था और दूसरा पैकेट विक्रय कर दिया जाता था। इनसे बातचीत में यह सामने आया कि इनके करीब 25 वाहन आए हैं, जो जगह-जगह माल बेच रहे हैं। 

पाकिस्तान का था छुहारा

ड्राई फ्रूटस  कारोबारियों का कहना था कि छुहारा ज्यादातर पाकिस्तान से ही आता है। इस बार पैदावार अच्छी हुई है। संभवतः ये जो माल शहर में आया है यह पाकिस्तान का है, जो गुजरात के पोर्ट पर उतरा होगा और वहां से सेटिंग से माल निकल गया होगा, जो बेचने के लिए विभिन्न जगहों पर भेज दिया गया है।

कहते हैं विशेषज्ञ

ड्राई फ्रूटस व्यापारी भीम लाल गुप्ता कहते हैं कि छुहारा प्रायः पाकिस्तान से आता है। ये जो छुहारा शहर में बिक रहा है। यह बॉडर पर सेटिंग से निकाला माल हो सकता है। इस विक्रय से सरकार के टैक्स में हानि हो रही है।

-हम तो लेकर ठग गए। पैकेट के बीच में खराब छुहारा था। 

अनिल श्रीवास्तव

-दिखने में छुहारा ठीक था लेकिन जब घर पर उसे खोला तो कई खराब थे।

बल्देव अवस्थी

- वजन में फर्क था। हमने जब उसे तुलवाया था तो 900 ग्राम ही निकला।

संजय तिवारी

अनसुलझे सवाल

- छुहारे के विक्रय पर टैक्स विभाग खामोश रहा।

- कामर्शियल वाहन में विक्रय होने पर परिवहन विभाग का मौन।

- खुले में विक्रय पर खाद्ध विभाग ने सुध नहीं ली।

-रेट कंट्र्ोल विभाग का भी कहीं पता नहीं।

-छुहारा विक्रय कर रहे लोगों की कोई पहचान नहीं।

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