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आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के पहले ही रेलवे कास्ट कटिंग, खर्चों में कटौती के जरिये फंड प्रबंधन में लगा

नई दिल्ली. 31 दिसम्बर 2025 को सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा का समय समाप्त हो रहा है. जिसे देखते हुए भारत सरकार ने आठवां वेतन आयोग का गठन कर दिया है और इसकी अनुशंसा 1 जनवरी 2026 से लागू किया जाना है। जिसे देखते हुए रेलवे ने अभी से अपने कर्मचारियों के लिए तैयारियां शुरू कर दी है. उसने वेतन आयोग की सिफारिशों के पश्चात बढऩे वाले आर्थिक बोझ का मैनेजमेंट शुरू कर दिया है. माना जा रहा है कि कास्ट कटिंग, अधिक लदान सहित अन्य उपायों के जरिये वह फंड का प्रबंध कर लेगा.

जानकारों का मानना है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने से कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा होना तय है। यही ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले समय में कर्मचारियों के वेतन पर बढऩे वाले खर्च को लेकर अभी से तैयारी में जुट गया है। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद रेलवे के खर्च में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। इसी को देखते हुए रेलवे ने अपने फाइनेंस को मजबूत करने के लिए कई खर्च-कटौती और सेविंग से जुड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

18 महीने में आएगी रिपोर्ट

आठवां वेतन आयोग जनवरी 2025 में गठित किया गया था और इसे अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। रेलवे को पिछली बार सातवें वेतन आयोग के अनुभव से बड़ा सबक मिला था। साल2016 में जब सातवां वेतन आयोग लागू हुआ था, तब कर्मचारियों की सैलरी में 14 से 26 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई थी, जिससे वेतन और पेंशन का सालाना बोझ करीब 22,000 करोड़ रुपये बढ़ गया था। अब आंतरिक आकलन के मुताबिक आठवें वेतन आयोग के बाद यह एक्स्ट्रा बोझ 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

रेलवे ने बढ़ाया अधिक कमाई पर फोकस

हालांकि, रेलवे के अधिकारी इस चुनौती को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बढ़ते खर्च को संभालने की पूरी योजना पहले से तैयार की जा रही है। इसके लिए आंतरिक संसाधनों, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और माल ढुलाई (फ्रेट) से होने वाली आय बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है।

कर्मचारी संगठनों की मांग से रेलवे दबाव में

कर्मचारी संगठनों की मांगें भी रेलवे के लिए चुनौती बन सकती हैं। सातवें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जबकि अब यूनियनें 2.86 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं। अगर यह मांग मानी जाती है, तो वेतन खर्च में 22 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। रेलवे का मानना है कि सही योजना और बढ़ती इनकम के जरिए वेतन आयोग के असर को बैलेंस किया जा सकेगा।

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