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डिजिटल संवाद से समाधान: जबलपुर में फेसबुक लाइव के जरिए सुलझीं किसानों की मुश्किलें


कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की पहल पर फेसबुक लाइव से जुड़े अधिकारी और कृषक

जबलपुर।  जिला प्रशासन ने कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह की अनूठी पहल पर शुक्रवार को जिला प्रशासन के फेसबुक पेज पर 'फेसबुक लाइव' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रदेश में अपनी तरह के इस पहले प्रयोग का उद्देश्य उर्वरक (खाद) वितरण की नई ई-टोकन प्रणाली को लेकर किसानों की शंकाओं का समाधान करना था। शाम 4 बजे शुरू हुए इस लाइव सत्र में न केवल जबलपुर, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों के किसान भी बड़ी संख्या में जुड़े। संवाद के दौरान उप संचालक कृषि डॉ. एस.के. निगम और जिला विपणन अधिकारी हितेंद्र रघुवंशी ने किसानों के सवालों के सीधे जवाब दिए। किसानों ने ई-टोकन जनरेट करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों, जैसे सभी खसरे एक साथ दर्ज न होना और 50 बोरी की मासिक सीमा जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 50 बोरी की सीमा भारत सरकार द्वारा निर्धारित है और वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर खाद का संतुलित उपयोग भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

कालाबाजारी पर लगाम और नई व्यवस्था की सराहना

​लाइव सत्र के दौरान किसानों ने इस पायलट प्रोजेक्ट की जमकर सराहना की। प्रहलाद पटेल और जितेंद्र पटेल जैसे कई प्रगतिशील किसानों ने कमेंट्स के माध्यम से बताया कि ई-टोकन व्यवस्था आने से खाद की कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगी है और अब असली किसानों को समय पर खाद मिल पा रही है। किसानों ने सुझाव दिया कि पारदर्शिता बढ़ाने वाली इस व्यवस्था को पूरे मध्य प्रदेश में लागू किया जाना चाहिए।अधिकारियों ने किसानों को व्यावहारिक समाधान भी दिए। उन्होंने बताया कि यदि किसान 3 दिन के भीतर खाद नहीं उठाता, तो टोकन स्वतः निरस्त हो जाता है। साथ ही, परिवार का कोई भी सदस्य ओटीपी  के माध्यम से खाद प्राप्त कर सकता है। सिकमी नामा (बटाईदार) किसानों के लिए भी सत्यापन के बाद खाद प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई गई। इस सफल संवाद के बाद अब जिला प्रशासन ने 22 दिसंबर (सोमवार) को 'धान उपार्जन' व्यवस्था पर अगला फेसबुक लाइव आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि धान खरीदी से जुड़ी किसानों की समस्याओं का भी मौके पर निपटारा किया जा सके।

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