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फॉलोअप- 'खाकी' करती थी हनी ट्रैप गैंग की मदद, पब्लिक की हिफाजत किन हाथों में

 


ये हैं वे चेहरे, जो हनी ट्रैप को अंजाम दे रहे थे

आरोपियों को कोर्ट ने भेजा जेल,एसपी ने पुलिस स्टाफ पर की कार्रवाई, जांच अभी जारी, युवती की गैंग और दो आरक्षक मिलकर कर रहे थे ब्लैकमेलिंग का खेल

जबलपुर। शहर में सोशल मीडिया के जरिए युवकों को फंसाने और ब्लैकमेलिंग करने वाले हनी ट्रैप गिरोह का खुलासा होने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गैंग की मास्टरमाइंड युवती रागिनी शर्मा, उसके दो सहयोगी साहिल बर्मन और विवेक अहिरवार के साथ-साथ यादव कॉलोनी चौकी के दो आरक्षकों,सचिन जैन और सिद्धार्थ सिंह,की संलिप्तता भी सामने आई है। घटना के बाद एसपी संपत उपाध्याय ने दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल लाइन अटैच कर दिया

-ये है युवक के फंसने की पूरी कहानी

वारदात की शुरुआत बेलखेड़ा के 19 वर्षीय युवक से हुई, जिसने इंस्टाग्राम पर रागिनी शर्मा से दोस्ती की थी। चैटिंग के दौरान रागिनी ने खुद को नरसिंहपुर जिले के करेली की रहने वाली बताया और भरोसा बनाकर युवक को मिलने के लिए जबलपुर बुलाया। युवक अपने रिश्ते के भाई के साथ विजय नगर पहुंचा, जहाँ युवती ने दोनों के साथ होटल में बैठकर चाय पी और फिर उन्हें शताब्दीपुरम स्थित किराए के कमरे में ले गई। कमरे में पहुँचते ही रागिनी ने खाने-पीने का सामान लाने के लिए युवक के भाई को बाहर भेज दिया। इसी बीच उसने अपने साथियों साहिल बर्मन और विवेक अहिरवार को फोन कर बुला लिया। लगभग दस मिनट बाद दोनों कमरे में घुस आए और रागिनी के इशारे पर बेलखेड़ा निवासी युवक पर हमला कर दिया। दोनों ने युवक के साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और उसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद तीनों आरोपियों ने युवक से एक लाख रुपये की मांग करते हुए धमकी दी कि यदि रकम नहीं दी गई तो वीडियो वायरल कर दिया जाएगा और युवती के साथ दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज करा दिया जाएगा। इसी दौरान युवक का भाई लौट कर आया, लेकिन उसे भी धमकाकर चुप करा दिया गया। घबराए दोनों भाइयों ने जबलपुर में रहने वाले परिजनों को घटना बताई। परिजन मौके पर पहुँचे और जब उन्होंने रकम देने से इनकार किया तो गैंग के सदस्य और अधिक उग्र हो गए।

-पांच मिनिट में आ गयी पुलिस

इसी समय रागिनी शर्मा ने यादव कॉलोनी चौकी में पदस्थ आरक्षक सचिन जैन और सिद्धार्थ सिंह को फोन कर बुला लिया। कॉल के पाँच मिनट के भीतर दोनों आरक्षक मौके पर पहुँच गए। जबकि सामान्य परिस्थिति में वहाँ पहुँचने में 10–15 मिनट लगते हैं। पीड़ितों का आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मियों ने भी उन्हें डाँटकर धमकाया और कहा कि युवती की शिकायत पर सीधे जेल जाना पड़ेगा। जब परिजनों ने यह बात एसपी संपत उपाध्याय को बताई, तो पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए एसपी ने तत्काल कोतवाली सीएसपी रितेश कुमार शिव को जांच सौंपी। जांच में यह तथ्य सामने आए कि दोनों आरक्षकों ने घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी थी, महिला संबंधी मामले में महिला पुलिसकर्मी को साथ नहीं लाए थे और पूरे घटनाक्रम को छिपाने की कोशिश की थी।

-गिरोह का खुलासा अभी शेष

पुलिस ने रागिनी शर्मा, साहिल बर्मन और विवेक अहिरवार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहाँ से तीनों को जेल भेज दिया गया। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गैंग में और कौन शामिल है, तथा अब तक कितने युवकों को इस हनी ट्रैप के जरिए ब्लैकमेल कर उनसे रकम वसूली गई। यह घटना इस बात का संकेत है कि जब अपराधियों को पुलिस का ही संरक्षण मिलने लगे, तो आम नागरिकों की सुरक्षा किस भरोसे पर टिकी रहेगी

महिला स्टाफ क्यों नहीं लाये

  • आरक्षक सचिन जैन और सिद्धार्थ सिंह को तत्काल लाइन अटैच
  • महिला शिकायत के बावजूद मौके पर नहीं लाई गई महिला आरक्षक
  • वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना नहीं दी, नियमों का उल्लंघन

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