बताया गया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनिता नागेश्वर की 13 नवम्बर को कार्य के दौरान तबियत बिगड़ गई। उन्हे बालाघाट फिर गोदियां के अस्पताल पहुंचाया गया। जहां पर हालत को देखते हुए नागपुर रेफर किया गया। जहां पर आज अनिता की मौत हो गई। उनकी पार्थिव देह को बालाघाट स्थित घर लाया गया। इस बात की खबर मिलते ही एसडीएम जीएस धुर्वे, बालाघाट एसडीएम गोपाल सोनी, तहसीलदार भूपेन्द्र अहिरवार और अन्य अधिकारी बांदरी पंचायत के बोट्टा गांव पहुंचे और शोकाकुल परिवार से मुलाकात की। वहीं अनिता की बेटी आरती ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीएलओ बनने के बाद उनकी मां पर काम का बहुत दबाव था। जिसके कारण उनकी तबीयत बिगड़ी और इलाज के बावजूद सुधार नहीं हुआ। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि किसी पर इतना दबाव न डाला जाए कि उसकी मानसिक स्थिति खराब हो जाए और मां की मौत के लिए न्याय की मांग की।
पीलिया और टाइफाइड का समय पर नहीं हुआ इलाज-
इस बीच जिला प्रशासन ने जनसंपर्क के माध्यम से एक बयान जारी किया है। लालबर्रा बाल विकास परियोजना अधिकारी ने बताया कि अनिता एक अच्छी कार्यकर्ता थीं, लेकिन उन्होंने पीलिया और टाइफाइड को गंभीरता से नहीं लिया और समय पर इलाज नहीं कराया। परियोजना अधिकारी ने यह भी बताया कि अनिता नागेश्वर को किसी कीड़े के काटने की बात भी सामने आई है। अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसारए उनके पूरे शरीर में संक्रमण फैल गया था और लिवर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।