जबलपुर। प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में अब जबलपुर भी तेजी से ऊपर आ रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक जिले में पराली जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता गंभीर रूप से बिगड़ रही है। धुआं न केवल वातावरण जहरीला बना रहा है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी सीधा असर डाल रहा है।
-जिले में रिकॉर्ड 614 घटनाएं दर्ज
सरकारी डेटा बताता है कि अक्टूबर के अंत से नवंबर तक जबलपुर में पराली जलाने की कुल 614 घटनाएं सामने आईं। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले सिवनी (533) में, दूसरे नंबर पर नर्मदापुरम है और तीसरे नंबर पर जबलपुर (355 नए मामले नवंबर में) में दर्ज किए गए। किसानों का कहना है कि यह उनकी मजबूरी है क्योंकि खेतों की सफाई और अगली फसल की तैयारी के लिए उनके पास विकल्प सीमित हैं।
-एफआईआर के बाद भी नहीं थमा सिलसिला
पराली जलाने पर रोक के लिए प्रशासन ने सख्ती दिखाई और कई किसानों पर एफआईआर भी दर्ज की, लेकिन हालात काबू में नहीं आए। पहले जारी आदेशों में कलेक्टर ने साफ कहा था कि पराली जलाने पर संबंधित किसान पर जुर्माना लगाया जाएगा और पुनरावृत्ति होने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद कई गांवों में किसान रात के समय पराली जलाकर प्रशासन की निगरानी से बच रहे हैं।
-किसानों की पीड़ा, जलाएं न तो क्या करें
किसानों का कहना है कि पराली न जलाएं, ये आदेश तो जारी कर दिए जाते हैं, लेकिन जमीन पर कोई विकल्प उपलब्ध नहीं कराया जाता। मशीनें महंगी हैं और समय कम। किसान संगठनों ने भी बार-बार कहा है कि सरकार विकल्प दे, तभी पराली जलाना रुकेगा।
-कार्रवाई में भी आई ढील
किसान आंदोलनों के बढ़ते प्रभाव के बाद प्रशासन ने नरमी भी दिखानी शुरू कर दी है। पहले जहां भारी कार्रवाई की बात हो रही थी, वहीं अब किसानों को समझाइश देकर छोड़ने के फैसले अधिक दिख रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दंडात्मक कदमों के साथ जागरूकता अभियान बढ़ाना जरूरी है, वरना यह समस्या हर साल और भयावह होती जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कहा है कि लगातार बढ़ता धुआं अस्थमा, एलर्जी, आंखों में जलन और सांस की बीमारियों को तेजी से बढ़ा रहा है।
